
ब्यावरा। शुरू से ही विवादों में रहे समर्थन मूल्य पर खरीदे जा रहे गेहूं को लेकर दिक्कतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही। परिवहन की समस्या प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। जिले से पहली रेक के तौर पर महाराष्ट्र के मालटेकड़ी जाने वाली रेक अभी तक नहीं आई है। रेस्ट्रेक्शन (यार्ड में व्यस्तत या ट्रेक पर काम) होने के कारण 27 अप्रैल तक रेक के आने के आसार नहीं है।
ऐसे में तीन दिन से ट्रक में गेहूं लोड खड़े ट्रक वाले परेशान हो रहे हैं। इधर, रेल्वे ने साफ तौर पर इनकार कर दिया है कि वे 24 घंटे से पहले रेक यार्ड में खाली नहीं करने दे सकते। ऐसे में परिवहन के साथ ही गेहूं की देख-रेख करना प्रशासन के लिए भारी पड़ रहा है। इस बार की खरीदी में जिले से पहली रेक में दिक्कतें आना शुरू हो गई है। अभी तक स्पष्ट यह भी नहीं हुआ है कि 27 तक माल ट्रकों में ही रहेगा या उन्हें वेयर हाउसेस पहुंचा दिया जाएगा।
24 घंटे पहले अनुमति देता है रेल्वे, पैनाल्टी भी
किसी भी रेक में माल लोड करने के लिए रेल्वे 24 या 12 घंटे पहले ही माल खाली करने की अनुमति देता है। इससे पहले रेल्वे स्पष्ट मना कर देता है। रेल्वे के नियमानुसार रेक खाली हो जाने के बाद भी एक निश्चित समयावधि में माल को लोड करना होता है। यदि तय समय में माल लोड नहीं होता तो प्रति रेक पर प्रति घंटे के हिसाब से तय पैनाल्टी लगती है, जो कि संबंधित विभाग को ही भुगतना पड़ती है।
फैक्ट-फाइल पत्रिका लाइव रिपोर्ट के अनुसार
-२५, ३३० किसानों से हुई खरीदी।
-११, ५९, ४०८.९० क्वींटल गेहूं खरीदे गए।
-१०, ५४, ४१०.०५ का परिवहन जिले के वेयर हाउस में।
-६५०० क्वींटल गेहूं पहली ही रेक में होना है लोड।
-महाराष्ट्र के मालटेकड़ी आएगी रेक।
-तीन से स्टेशन रोड पर डटे, 27 तक रुकना होगा।
-रेस्ट्रेक्शन होने से नहीं मिल पा रहा रेक।
(नॉन और एफसीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार)
बड़ा सवाल : जब रेक फ्री नहीं तो माल लोड क्यों किया?
फूड कॉर्पोरेशन द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं का काम देखा जा रहा है। इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रेस्ट्रेक्शन की दिक्कत रेल्वे में थी तो आखिर लोड क्यों किया गया? अब संबंधित ट्रक, परिवहन और लोडेड गेहूं का जिम्मेदार कौन? साथ ही यदि इस बीच जो खर्च होगा उसका भी जिम्मेदार कौन होगा, यह कह पाना मुश्किल हो रहा है। हालांकि परिवहन का पूरा जिम्मा एफसीआई के ठेकेदार की होती है, उसे ही पूरी पैनाल्टी वहन करना होगी। हालांकि एफसीआई के अफसरों का कहना है कि हमें इंडेन (यार्ड में रेक की अनुमति) मिलने के बाद ही गाडिय़ां बुलवाई थीं। अचानक से रेस्ट्रेक्शन हो जाने के कारण पूरा शेड्यूल गड़बड़ा गया।
हमें इंडेन क्लीयर मिला था
दो-तीन दिन से दिक्कत आ रही है, हमने वरिष्ठ अफसरों को अवगत करवा दिया है। वहां से जैसे निर्देश मिलेंगे उस हिसाब से हम प्लॉन करेंगे। इंडेन मिलने के बाद ही हमने गाडिय़ां बुलाई थीं। रेल्वे की ओर से अचानक रेस्ट्रेक्शन की सूचना मिली, इसके बाद ही ऐसी स्थिति बनी। इस परेशानी को दूर करने की हम प्लॉन कर रहे हैं।
-प्रवीण जैन, क्वालिटी कंट्रोलर, फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया
रेस्ट्रेक्शन हटने के बाद ही लगेगी रेक
24 अप्रैल को वैगन खाली होने की स्थिति में इंडेन दिया गया था, लेकिन मालटेकड़ी (महाराष्ट्र) स्टेशन पर रेस्ट्रेक्शन होने के कारण 27 तक रेक नहीं लगा सकते। साथ ही इस बीच हम माल खाली नहीं करवा सकते, हमें रेल्वे से ऐसी कोई अनुमति नही है। 24 घंटे से पहले हम यार्ड में माल नहीं रखने दे सकते। रेस्ट्रेक्शन हटने के बाद ही कुछ होगा।
-चंद्रभूषण कुमार, उप-स्टेशन प्रबंधक, ब्यावरा
हमें कोई मतलब नहीं कहां जाए गेहूं
हमारा काम सिर्फ खरीदने का है, उसके बाद एफसीआई उस गेहूं का कहां ले जा रहा है क्यों ले जा रहा है हमें कोई लेना-देना नहीं है। न ही हमारी कोई जवाबदारी है कि परिवहन क्यों अटका, आप एफसीआई वालों से पूछें, हमें उनसे कोई मतलब नहीं है।
-बी. एम. गुप्ता, जिला प्रबंधक, नॉन, राजगढ़