सीएए के समर्थन रैली के दौरान बीजेपी नेताओं पर चलाई थीं थप्पड़
राजगढ़/ शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता में आने से पहले अधिकारियों को चेताया था कि बॉयस होकर काम करने वालों को हम छोड़ेंगे नहीं, उनकी सूची तैयार हो रही है। शपथ लेने के बाद ही शिवराज सिंह चौहान एक्शन में दिखे। सबसे पहले गाज मुख्य सचिव पर गिरी। उसके बाद बीजेपी नेताओं को थप्पड़ मारकर सुर्खियों में आई राजगढ़ की कलेक्टर निधि निवेदिता पर भी गाज गिरी।
सीएम शिवराज सिंह चौहान के शपथ लेने के 21 घंटे के बाद यह राजगढ़ कलेक्टर निधि निवेदिता के तबादले की अधिसूचना जारी हो गई। निधि निवेदिता को राजगढ़ से हटाकर मंत्रालय में उप सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी जगह 2012 बैच के आईएएस अधिकारी नीरज कुमार सिंह को राजगढ़ कलेक्टर बनाया गया है। नीरज अभी मंत्रालय में ही बतौर उपसचिव तैनात थे।
क्यों चर्चा में आई थीं निधि निवेदिता
आईएएस अधिकारी निधि निवेदिता की छवि एक कड़क ऑफिसर की है। इस अंदाज के लेकर वह हमेशा सुर्खियों में रहती हैं। वह कई बार इन कारणों से विवादों में भी आईं। लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियों में बीजेपी नेताओं को थप्पड़ मारकर आईं। बीजेपी नेता सीएए के समर्थन में रैली निकाल रहे थे, इस दौरान निधि निवेदिता ने उन्हें थप्पड़ मारी थीं। मगर उस घटना के पर वह सफाई नहीं दी थी।
व्हाट्सएप ग्रुप में रखी बात
दरअसल, राजगढ़ के राज सूचना केंद्र के नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप है, जिसमें निधि निवेदिता भी जुड़ी हुई थीं। उनके तबादले के बाद उस ग्रुप में कई तरह की बातें चल रही थीं, जिसमें कुछ सवालों का उन्होंने जवाब दिया है। साथ ही थप्पड़कांड के दौरान कुछ बातें जो फैलाई गई थीं, उस पर भी निधि निवेदिता ने सफाई दी है।
मैं जेएनएयू की नहीं हूं
थप्पड़कांड के बाद प्रदर्शन करने के लिए बीजेपी के सारे नेता ब्यावरा पहुंचे थे। इस दौरान बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से कहा था कि मुझे जानकारी मिली है कि कलेक्टर साहिबा भी जेनएनयू की हैं। यानी यहां जेएनयू का वायरस पहुंच गया है। इस पर कलेक्टर ने तबादले के बाद कहा है कि मैं जेएनयू की नहीं हूं। मीडिया बिना जानकारी और तथ्यों को इसे छापती रही है।
क्यों मारीं थप्पड़
वहीं, उन्होंने थप्पड़कांड पर सफाई देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही थी। इसलिए ऐसा हुआ। साथ ही उन्होंने थप्पड़ कांड की घटना को एक संयोग बताया और कहा कि धारा 144 के दौरान इस तरह की रैली निकालना कहां तक उचित है।