राजगढ़

वेतन मांगने पर बजट न होने का मिल रहा हवाला, नौकरी जाने का डर, राजगढ़ में आउटसोर्स कर्मचारियों का दर्द

Outsource Employees : आउटसोर्स कर्मचारियों ने कहा- 'साहब... मरे हुए के पैसे निकल रहे हैं, हम तो जिंदा हैं, हमारी सैलरी तो डालो' 5-7 महीने से नहीं मिला वेतन, अस्पतालों में सेवा देने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों में नाराजगी।
2 min read
Outsource Employees
कलेक्टर से गुहार लगाने पहुंचे आउटसोर्स कर्मचारी (फोटो सोर्स: Patrika)

Rajgarh News :मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेवा करने वाले आउटसोर्स कर्मचारी खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। किसी को 5 तो किसी को 7 महीने से वेतन नहीं मिला है। दिन-रात ड्यूटी करने के बावजूद खाते में पैसा नहीं पहुंचने से कर्मचारियों के सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है। त्योहार सिर पर हैं, लेकिन घरों में राशन, बच्चों की फीस और मकान का किराया जुटाना मुश्किल हो रहा है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों का आक्रोश अब फूटने लगा है।

जिले के खुजनेर, पचोर, जीरापुर, ब्यावरा, नरसिंहगढ़, सारंगपुर और खिलचीपुर समेत विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में वर्ल्ड क्लास आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर, लैब टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, सफाईकर्मी और सुरक्षा गार्ड सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारी मंगलवार को फिर से कलेक्टर से मिले और पीड़ा जाहिर की। उनका कहना है कि वे लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन पांच से सात महीने का वेतन अब तक नहीं मिला है। स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने वाले इन कर्मचारियों को अपने ही मेहनताने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

'मरे हुए के पैसे निकल रहे हैं, जिंदा कर्मचारियों को वेतन नहीं'

नाराज कर्मचारियों ने भुगतान व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, 'साहब, मरे हुए के पैसे निकल रहे हैं, हम तो जिंदा हैं, दिन-रात काम कर रहे हैं, हमारी सैलरी तो डालो।' कर्मचारियों का दावा है कि, मृत व्यक्तियों के नाम पर राशि निकाले जाने की बात सामने आ रही है, जबकि काम कर रहे कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला। हालांकि, मृत व्यक्तियों के नाम पर भुगतान के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों की जांच और संबंधित विभाग और एजेंसी का पक्ष सामने आना जरूरी है।

'वेतन मांगो तो बजट न होने का जवाब, नौकरी जाने का डर अलग'

कर्मचारियों का आरोप है कि, वेतन के संबंध में कंपनी के प्रबंधक से बात करने पर बजट नहीं होने का हवाला दिया जाता है। वहीं, कुछ कर्मचारियों ने वेतन मांगने पर नौकरी से निकालने की धमकी मिलने की बात भी कही है। ऐसे में कर्मचारी अपने हक का पैसा मांगने और नौकरी बचाए रखने के बीच उलझे हैं। उनका सवाल है कि जब वे नियमित रूप से काम कर रहे हैं, तो वेतन के लिए महीनों इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? भुगतान में देरी की जिम्मेदारी किसकी है—संबंधित विभाग की या आउटसोर्स कंपनी की?

एकमुश्त भुगतान और हर माह पांच तारीख तक वेतन की मांग

कर्मचारियों ने पांच से सात महीने का लंबित वेतन एकमुश्त जारी करने, हर महीने की पांच तारीख तक नियमित भुगतान सुनिश्चित करने और वेतन मांगने पर धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि ,वे कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं मांग रहे, बल्कि अपने काम का मेहनताना चाहते हैं। अब सवाल यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार काम कर रहे इन कर्मचारियों को बकाया वेतन कब मिलेगा और भुगतान व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी क्या कदम उठाएंगे?

Updated on:
13 Oct 2026 06:43 pm
Published on:
13 Oct 2026 06:43 pm