
Rajgarh News :मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में रिश्वत मांगने के आरोप में कलेक्ट्रेट के ठीक नीचे स्थित तहसील कार्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी पर बड़ी कार्रवाई की गई है। कलेक्टर डॉ. गिरिश कुमार मिश्रा ने तहसील राजगढ़ में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 प्रवाचक राहुल वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कर्मचारी पर एक व्यक्ति से 3 हजार रुपए की रिश्वत मांगने और राशि लेने का आरोप है। कलेक्टर ने इस संबंध में निलंबन आदेश जारी कर दिया है।
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अधिवक्ता संदीप सरावत ने आवेदन प्रस्तुत कर शिकायत की थी कि, आवेदक गिरधारी तंवर के दामाद सांवरिया पिता मोरसिंह को राजगढ़ पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 के तहत गिरफ्तार कर कार्यपालिक मजिस्ट्रेट राजगढ़ के समक्ष पेश किया था। आरोप है कि, इसी दौरान तहसील राजगढ़ में पदस्थ प्रवाचक राहुल वर्मा ने 3 हजार रुपए की मांगते हुए राशि ली थी। साथ ही, कथित तौर पर कहा था कि, अगर रुपए नहीं दिए तो आरोपी की जमानत खारिज हो जाएगी।
लगे आरोपों को लेकर बाबू राहुल वर्मा को बुलाकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। उन्होंने लिखित जवाब देते हुए कहा कि, उन्होंने लिखित जवाब में कहा कि, फवकी ओर से कोई रिश्वत नहीं मांगी गई। न ही कोई पैसा लिया गया। हालांकि, कलेक्टर ने उपलब्ध प्रकरण का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया माना कि, राहुल वर्मा ने अपने पदीय कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया। इसे मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत और दंडनीय माना गया।
कलेक्टर के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में होने के कारण वकीलों को अपर कलेक्टर के समक्ष भेजा गया। अपर कलेक्टर प्रतापसिंह चौहान के चैम्बर में हंगामा करते हुए वकीलों ने कहा था कि, ये सरेआम मनमानी है। इसपर अंकुश लगना जरूरी है। इसपर कार्रवाई होना चाहिए। इससे पहले सभी अधिवक्ता संबंधित बाबू के पास भी पहुंचे थे और कहा था कि, आप हमें रुपए चेक करवा दो हम मान जाएंगे। उन्होंने यहां तक दावा किया था कि, 3 हजार की कुल रिश्वत में 500-500 के पांच और 100-100 के पांच नोट लिए गए। इसपर बाबू ने कहा कि, मैं क्यों जेब चेक करवाऊं, मेरे पास अन्य रुपए भी हैं। ऐसे काफी देर तक गहमा-गहमी बनीं रही। बाद में जब अपर कलेक्टर के समक्ष भी वकीलों और बार एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष अविनाश दशेरिया ने रिश्वतखोरी के आरोप लगाए और सुधार न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी थी।
जानकारी के अनुसार, हंगामा शांत होने के कुछ देर बाद दोबारा पक्षकार और वकीलों को बुलाया गया और संबंधित बाबू ने बंद कमरे में रिश्वत में लिए हुए 3 हजार उन्हें लौटा दिए। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने इस पूरे मामले पर कहा था कि, मामला बेहद गंभीर है और अगर सही है तो गलत भी है। हमने जांच बैठा दी है। अब इस इस मामले में कलेक्टर की ओर से कार्रवाई की गई है।