राजगढ़

मन्नत पूरी होते ही उल्टे से सीधा हो जाता है स्वस्तिक, राजगढ़ वाली माता करती चमत्कार

Mata Jalpa Rajgarh : मां जालपा के मंदिर में गेहूं के दानों की गणना से तय होते हैं विवाह मुहूर्त, मां करती चमत्कार, दूर दूर से दर्शन करने आ रहे भक्त
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Oct 14, 2026
राजगढ़ की माता जालपा
राजगढ़ की माता जालपा image patrika

Mata Jalpa Rajgarh : देश-प्रदेश में नवरात्रि की धूम मची हुई है। जहां घरों में व्रत रखकर मां की पूजा पाठ कर रहे हैं वहीं सभी शक्तिपीठों पर माता के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लंबी कतारें लग रहीं हैं। एमपी के राजगढ़ के सभी देवी मंदिरों में भी यही हालात हैं। यहां के कुछ मंदिर तो बहुत विख्यात हैं। राजगढ़ जिला मुख्यालय से लगभग 4 किमी दूर टेकरी पर विराजी हैं मां जालपा। मंदिर में गेहूं के दानों की गणना से विवाह मुहूर्त तय होते हैं। मन्नत मांगने का तरीका तो बेहद खास है। मां जालपा के मंदिर में मन्नत पूरी होते ही स्वस्तिक चिन्ह उल्टे से सीधा हो जाता है। राजगढ़ वाली माता के दर्शन करने दूर दूर से भक्त आ रहे हैं।

भील राजा की कुलदेवी मां जालपा

जनश्रुतियों के अनुसार 550 वर्ष पूर्व भील राजा इस मंदिर को अपनी कुलदेवी मानते थे। सिंहवाहिनी माता की पाषाण प्रतिमा के विषय में मान्यता है कि यह पीपल के पेड़ के नीचे प्रकट हुई थी। शुरुआती समय में एक चबूतरे पर विराजी थीं। तब के शासकों ने मंदिर बनवाने प्रयास किया, पर दीवारें टिक नहीं पाईं। बाद में जनसहयोग से मंदिर का निर्माण किया गया।

मंदिर की विशेषता यहां की 'पाती' परंपरा

लगभग 1100 वर्ष पुराने माता जालपा के मंदिर में आस्था के कई अनोखे रंग देखने को मिलते हैं। मंदिर की विशेषता यहां की 'पाती' परंपरा है। जिन परिवारों को पंचांग में विवाह का शुभ मुहूर्त नहीं मिलता, वे ज्वार या गेहूं के दाने लेकर माता दरबार में पहुंचते हैं। यहां पुजारी पारंपरिक तरीके से दानों की गणना कर विवाह की शुभ तारीख बताते हैं।

मंदिर में उल्टा स्वस्तिक

पं. धर्मेंद्र शर्मा के अनुसार श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना के लिए मंदिर में उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं। मनोकामना पूरी होने पर फिर आकर सीधा स्वस्तिक बनाते हैं, जिसे माता के प्रति आभार का प्रतीक माना जाता है। जालपा वाली माता के चमत्कार के कई किस्से कहे सुने जाते हैं।

ऐसे पहुंचें

सड़क मार्ग: जयपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे पर राजगढ़ जिला मुख्यालय से चार किलोमीटर खिलचीपुर की ओर पहाड़ी पर स्थित है मंदिर।

रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन ब्यावरा। यहां से मंदिर की दूरी लगभग 26 किलोमीटर।

हवाई मार्ग: नजदीकी एयरपोर्ट राजाभोज अंतरराराष्ट्रीय हवाई अड्डा भोपाल। यहां से सड़क मार्ग से 132 से 135 किलोमीटर दूर।

Updated on:
14 Oct 2026 09:28 am
Published on:
14 Oct 2026 09:27 am