
राजगढ़। खुजनेर से रेफर होकर राजगढ़ के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती एक नवजात बालिका की तबियत बुधवार की रात करीब ११ बजे बिगडऩे लगी। कुछ समय तक नर्सिंग स्टाफ ने मामला देखा। लेकिन जब बात नहीं संभली तो ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक को इसकी सूचना दी। लेकिन ५०० मीटर के दायरे में बने इस अस्पताल में उन्हें बच्चा वार्ड से १०० मीटर की दूरी पर बने एसएनसीयू वार्ड में आने में साढ़े तीन घंटे का समय लग गया। जब तक बच्ची आखरी सांसे गिन रही थी।
रीना पति अशोक निवासी संडावता ने १० जून को खुजनेर में एक बच्ची को जन्म दिया। पीलिया बढऩे के कारण उसे राजगढ़ रेफर किया। जहां उसका इलाज चल रहा था। ११ पाइंट पीलिया होने के बाद बुधवार को सामने आई जांच में यह बढ़कर १५ पाइंट पर पहुंच गया। लेकिन बच्ची की हालत बेहतर थी। ऐसे में स्थानीय स्तर पर ही उसका इलाज चलता रहा। रीना की माने तो रात में दस बजे दूध पिलाने के लिए उन्हें बुलाया था। जब बच्चे को दूध पिलाया तो उसने दूध नहीं पिया और तेज सांसे चलने लगी। जब इसकी जानकारी ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को दी गई तो उन्होंने उनके स्तर पर इलाज शुरू किया। लेकिन बच्ची की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
हालत बिगड़ते देख रात एक बजे ड्यूटी डॉ.धर्मेन्द्र यादव को सूचना दी। लेकिन वे वार्ड से गायब थे। कुछ लोगों ने बताया कि उनके पास बच्चा वार्ड भी है। जब वे बच्चा वार्ड पहुंचे तो वहां भी डॉ.नहीं मिले। स्टाफ ने अर्जेट कॉल किया। इस पर भी वे एसएनसीयू वार्ड तक नहीं पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम में साढ़े तीन घंटे का समय निकल गया और साढ़े चार बज गए। तब कहीं जाकर डॉक्टर वहां पहुंचे। परिजनों का कहना था कि बच्ची उस समय तक खत्म हो गई थी और यह हमें समझाने के लिए उसे आक्सीजन लगा रहे थे। परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि चिकित्सक समय पर आ जाते तो शायद उनकी बच्ची बच जाती।
संबंधित डॉक्टर और स्टाफ को नोटिस जारी कर रहे है कि आखिर उन्हें आने में देर क्यों हुई और परिजनों की शिकायत है कि डॉक्टर का व्यवहार भी ठीक नहीं था। इस तरह से परिजनों से अभद्र व्यवहार क्यों किया गया।
डॉ.आरके माथुर, प्रभारी एसएनसीयू राजगढ़