
Wheat Registration Fraud: गेहूं पंजीयन में सामने आए बड़े फर्जीवाड़े पर आखिरकार प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कलेक्टर के निर्देश पर जांच पूरी होने के बाद चार पटवारियों को निलंबित कर दिया गया, चार कम्प्यूटर ऑपरेटरों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं और चार तत्कालीन तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। आठ समिति प्रबंधकों और कंम्प्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ एफआइआर (FIR) दर्ज कराई गई है। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि फर्जी पंजीयन के आधार पर कितनी मात्रा में गेहूं की खरीदी हुई और शासन को कितना आर्थिक नुकसान पहुंचा। बता दें कि आरोपियों ने भू-अभिलेखों में हेराफेरी कर अपात्रों और यहां तक कि भगवान के नाम पर दर्ज जमीनों पर फर्जी तरीके से गेहूं का पंजीयन कराकर लाखों का वारा-न्यारा किया था। मामले को पत्रिका ने उजागर किया था।
प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही और मिलीभगत को देखते हुए तत्कालीन तहसीलदार ब्यावरा सुभाष आलावे, राजगढ़ के तहसीलदार अनिल शर्मा, खुजनेर के तहसीलदार नित्यानंद पांडे और सुठालिया के तत्कालीन तहसीलदार दोजीराम अहिरवार को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। कर्तव्य में लापरवाही बरतने पर हल्का पटवारी करनवास, पूरनखेड़ी, कचनारिया और माल्याहेड़ी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पैस खांडियापुरा के मामले में गड़बड़ी पाए जाने पर समिति प्रबंधक ओमप्रकाश रजावत, कम्प्यूटर ऑपरेटर अरविंद यादव और तत्कालीन तहसीलदार सुठालिया दोजीराम अहिरवार को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हुए उन्हें भी नोटिस (Wheat Registration Fraud Notice) थमाया गया है।
राजस्व और सहकारिता विभाग में हड़कंप मचाते हुए प्रशासन ने आठ अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस थानों में एफआइआर दर्ज (Wheat Registration Fraud FIR Filed) कराई है। इनमें पैस आसारेटा पंवार के समिति प्रबंधक लखनसिंह परमार, कम्प्यूटर ऑपरेटर प्रीतम सिंह, पैस ढकोरा के समिति प्रबंधक राधेश्याम दांगी, कम्प्यूटर ऑपरेटर कोमल प्रसाद दांगी, पैस हराना के समिति प्रबंधक कालूराम गोस्वामी, कम्प्यूटर ऑपरेटर मनोहरलाल पुष्पद (निलंबित), उदनखेड़ी के समिति प्रबंधक और कम्प्यूटर ऑपरेटर भगवानसिंह राजपूत शामिल हैं।
कलेक्टर के निर्देश पर फर्जीवाड़े में संलिप्त चार कम्प्यूटर ऑपरेटरों को तत्काल सेवा से पृथक कर दिया गया है। नौकरी से निकाले गए ऑपरेटरों में प्रीतम सिंह (आसारेटा पंवार), कोमलप्रसाद दांगी (ढकोरा), मनोहरलाल पुष्पद (हराना) और भगवानसिंह राजपूत (उदनखेड़ी) शामिल हैं। इसके साथ ही आगामी उपार्जन व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए कुछ समिति प्रबंधकों और ऑपरेटरों को भविष्य की खरीदी प्रक्रिया से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इनमें आसरेटा पंवार के समिति प्रबंधक लखनसिंह परमार, ढकोरा के राधेश्याम दांगी, हराना के कालूराम गोस्वामी और उदनखेड़ी के मोहनलाल चौरासिया के नाम शामिल हैं।
यह सीधे तौर पर किसान पंजीयन नीति का उल्लंघन (Wheat Registration Fraud Violation of the farmer registration policy) है। नियम के अनुसार भू-अभिलेख और आधार कार्ड में नाम का मिलान होना आवश्यक है, जबकि नामों में विसंगति होने पर तहसीलदार या नायब तहसीलदार को पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर विधिवत सत्यापन करना होता है। इसी आधार पर संबंधितों को दोषी पाया है और कार्रवाई की गई है।
-अजीत सिंह, जिला आपूर्ति अधिकारी, राजगढ़