राजगढ़

कौन हैं एमपी के मोहन नागर, जिन्हें मिला पद्मश्री सम्मान…

Padma Shri Awards 2026: मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के मोहन नागर पद्मश्री से सम्मानित होंगे।
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Jan 25, 2026
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Padma Shri Awards 2026: गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस वर्ष-2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा की। इस प्रतिष्ठित लिस्ट में मध्यप्रदेश से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले राजगढ़ जिले के सारंगपुर तहसील के रायपुरिया गांव निवासी पर्यावरणविद् मोहन नागर का नाम शामिल किया गया है। केंद्र सरकार उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करेगी।

कौन हैं मोहन नागर

मोहन नागर सारंगपुर के रायपुरिया निवासी हैं। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित रहे हैं। प्रकृति, पर्यावरण, नदी और जल संरक्षण के प्रति उनके गहरे लगाव ने उनके जीवन की दिशा तय की। उन्होंने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जल संरक्षण के स्थायी और व्यवहारिक उपायों पर कार्य करने के लिए मप्र के बैतूल जिले को अपना प्रमुख कार्यक्षेत्र बनाया। जल संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर और प्रभावी प्रयासों के चलते मोहन नागर को “जल पुरुष” के रूप में भी पहचान मिली। उन्होंने वर्षा जल संग्रहण, नदी पुनर्जीवन और ग्रामीण स्तर पर जल जागरूकता को लेकर कई नवाचार किए, जिससे हजारों ग्रामीणों को प्रत्यक्ष लाभ मिला और सूखे क्षेत्रों में जल संकट से राहत मिली।

मोहन नागर को राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त है

मोहन नागर वर्तमान में मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष हैं और उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त है। उन्हें 23 अगस्त 2024 को मध्य प्रदेश शासन द्वारा उन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही वे बैतूल जिले में संचालित भारत भारती आवासीय विद्यालय के सचिव भी हैं और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके परिवार में एक पुत्री भारती नागर (26) और पुत्र जयंत नागर (22) हैं। उनके छोटे भाई करनसिंह नागर वर्तमान में रायपुरिया गांव में निवासरत हैं।

लंबे दशकों से पर्यावरण के लिए योगदान दे रहे

सक्रिय और जमीनी स्तर पर कार्यरत पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और समग्र पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में उनके दशकों लंबे योगदान ने न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को मजबूती दी है, बल्कि समाज को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है। 23 फरवरी 1968 को जन्मे मोहन नागर, स्व. भवरलाल नागर और स्व. गुलाबदेवी नागर के सुपुत्र हैं। उन्होंने विक्रम यूनिवर्सिटी, उज्जैन से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। वर्तमान में वे बैतूल स्थित भारत भारती आवासीय विद्यालय परिसर में निवासरत हैं।

जल सरंक्षण में दिया महत्वपूर्ण योगदान

मोहन नागर ने विशेष रूप से बैतूल जिले की सोना घाटी में वर्षाजल संचयन और जल संरचनाओं के निर्माण के माध्यम से प्राकृतिक जल चक्र को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। सूखते जल स्रोतों, गिरते भू-जल स्तर और जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में उनके प्रयासों ने जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ खेती और आजीविका को भी संबल दिया है। उनके कार्यों का प्रभाव यह रहा कि स्थानीय स्तर पर लोग स्वयं जल संरक्षण की पहल से जुड़ने लगे।

जनआंदोलन के रूप में उभरा गंगा अवतरण अभियान

मोहन नागर के द्वारा शुरू किया गया ‘गंगा अवतरण अभियान’ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक जनआंदोलन के रूप में उभरा। इस अभियान के माध्यम से उन्होंने स्थानीय समुदायों को जोड़ते हुए वैज्ञानिक और पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों को साझा किया। जल संरचनाओं का निर्माण, तालाबों और नालों का पुनर्जीवन, वर्षाजल संग्रहण और जनजागरूकता इस अभियान के प्रमुख स्तंभ रहे हैं। जल संरक्षण के साथ-साथ मोहन नागर ने जैविक कृषि, गो-संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

Updated on:
25 Jan 2026 08:10 pm
Published on:
25 Jan 2026 08:09 pm