
CG Weather Update: कार्तिक माह में बंगाल की खाड़ी से आए चक्रवाती तूफान के कारण अबागढ़ चौकी तहसील के दर्जनों गांवों में बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यह बारिश सावन-भादो की तरह लगातार हो रही है, जिससे धान की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। ( CG News ) बता दें कि प्रदेश में चक्रवाती तूफान मोलथा का असर दिख रहा है। जिसके चलते आज से कई जिलों में बारिश का दौर शुरू हो गया है। इधर किसान, जिनकी फसलें पककर तैयार थीं और कटाई भी शुरू हो चुकी थी, अब बेमौसम बारिश के कारण परेशान हैं।
खड़ी फसलों के साथ-साथ, जो धान काटकर खेतों में रखा गया था, वह भीगकर खराब हो गया है। खासकर, अरधना किस्म की धान जो एक महीने पहले ही पक चुकी थी, वह इस बारिश के कारण पूरी तरह से प्रभावित हुई है। कुछ किसानों ने दीपावली के बाद धान की कटाई शुरू की थी, लेकिन चक्रवाती तूफान के कारण उनका काम रुक गया। धान के पौधों में नरमी आ गई है और बाली टूटकर गिरने लगी है, जिससे फसल के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
यह स्थिति अबागढ़ चौकी तहसील के विभिन्न गांवों में देखी जा रही है, जिनमें कौड़ीकसा, मुरेटीटोला, देवरसूर, कलकसा, भगवान टोला, अरजकुण्ड, पण्डरीतराई, बिहरीकला और मेटेपार गांव प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है, और सभी प्रभावित किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
प्रदेश में 27 अक्टूबर से बारिश होने वाली है। 28 अक्टूबर को एक-दो स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं 29 अक्टूबर को भारी से अतिभारी बारिश हो सकती है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले मोलथा तूफान के कारण प्रदेश के मौसम में बदलाव आने वाला है। यह किसानों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिनों तक दक्षिण छत्तीसगढ़ में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
तहसीलदार अनुरीमा टोप्पो ने इस मामले में कहा कि जहां-जहां नुकसान हुआ है, वहां हल्का पटवारी को भेजकर नुकसान का मूल्यांकन कराया जाएगा। भू राजस्व संहिता के तहत उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा। प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है और किसानों को राहत देने के लिए जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
किसानों का कहना है कि जैसे ही धान काटने का काम शुरू हुआ, बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। बंशीराम, प्यारेलाल, रामनाथ, गैंदसिंह, पीलालाल, आनन्द राम और अन्य किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि फसलों के नुकसान का मूल्यांकन किया जाए और उन्हें उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। इन किसानों का कहना है कि बेमौसम बारिश ने उनकी फसलें नष्ट कर दी हैं और इससे उनका आर्थिक नुकसान हुआ है।