Chhath Puja 2023 : उत्तर भारतीयों का महापर्व छठ की शुरुआत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ हो चुकी है।
राजनांदगांव। Chhath Puja 2023 : उत्तर भारतीयों का महापर्व छठ की शुरुआत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ हो चुकी है। शनिवार को खरना के बाद उगते और दूसरे दिन रविवार शाम को डूबते सूर्य को अध्र्य देने के बाद सोमवार की सुबह उगते सूर्य को अध्र्य देने के साथ ही पर्व का समापन होगा। उत्तर भारतीय समाज के लोग शहर के मोतीतालाब सहित ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ जगहों पर छठ पर्व मनाएंगे। ऐसी मान्यता है कि छठ पूजा घर में सुख, समृद्धि और संतान के लिए की जाती है और व्रती की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
खरना कार्तिक शुक्ल की पंचमी तिथि को
नहाय- खाय के साथ शुक्रवार को छठ पर्व की शुरुआत हो गई है। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं स्नान कर सात्विक भोजन करती हैं। जिसे नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। नहाय-खाय के अगले दिन शनिवार खरना होगा। खरना कार्तिक शुक्ल की पंचमी तिथि को होता है। इस दिन व्रती दिन भर व्रत रखते हैं। शाम को भगवान को प्रसाद चढ़ाकर भोजन करते हैं।
कब मनाया जाता है यह पर्व
कार्तिक शुक्ल षष्ठी को यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व में व्रतियों को काफी कठिन उपवास रखना पड़ता है और सामाजिक रूप से इस पर्व का काफी महत्व है। चार दिवसीय अनुष्ठान शनिवार को उगते सूर्य को अघ्र्य अर्पण के साथ संपन्न होगा। इस व्रत की शुरुआत नहाय खाय की विधि के साथ होती है। इसके तहत व्रती सुबह घरों की साफ-सफाई करते हैं और स्नान करने के बाद मिट्टी के चूल्हे पर अरवा चावल के भात, चने की दाल और लौकी कद्दू की सब्जी बनाते हैं। इससे पहले व्रती सूर्य देवता को भोग लगाते हैं और अपने स्वजनों की मंगल कामना करते हैं।
मोतीतालाब, टेडेसरा और अंजोरा में बनाया गया है घाट
छठ व्रती बिना किसी बाधा के इस अनुष्ठान को तप और निष्ठा के साथ पूरा करते है। शनिवार को खरना होगा। रविवार को भगवान सूर्य को शाम 5.31 पर अघ्र्य दिया जाएगा। इसके बाद सोमवार को उगते सूर्य को प्रात: 6.30 बजे अघ्र्य दिया जाएगा। शहर के मोती तालाब और ग्रामीण क्षेत्र के टेडेसरा व अंजोरा सहित अन्य जगहों पर बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय लोग निवास करते हैं। इन जगहों पर तालाबों में पूजा के लिए घाट बनाया गया है। जहां पर डूबते व उगते सूर्य को अघ्र्य दिया जाएगा।