जिला किसान संघ के संयोजक सुदेश टीकम सहित जिले भर के किसान सरकार से समर्थन मूल्य में चना खरीदी करने लगातार मांग कर रहे हैं और आंदोलन कर रहे हैं।
राजनांदगांव. समर्थन मूल्य में चना खरीदी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना देेने के साथ ही आमरण अनशन पर बैठ गए किसान नेता सुदेश टीकम को पुलिस ने अनशन स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती कर दिया है। सुदेश २० मई से अन्न-जल त्यागकर अनशन पर थे। किसान 11 मई से कलेक्टोरेट के सामने धरना दे रहे हैं।
जिला किसान संघ के संयोजक सुदेश टीकम सहित जिले भर के किसान सरकार से समर्थन मूल्य में चना खरीदी करने लगातार मांग कर रहे हैं और आंदोलन कर रहे हैं। 11 मई से जारी बेमुद्दत धरना के बाद २० मई से सुदेश टीकम ने आमरण अनशन शुरू कर दिया था।
अनशन के दूसरे दिन कल २१ मई की शाम मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सक ने धरना स्थल में जाकर सुदेश टीकम का स्वास्थ्य परीक्षण किया था। बीपी और सुगर सहित कई जांच के बाद कल ही देर रात सुदेश टीकम को पुलिस ने जबरिया उठाकर अस्पताल में भर्ती कर दिया है। किसानों के आंदोलन को कई सोसायटियों का समर्थन मिल रहा है।
धरना स्थल में अलग अलग संगठनों के लोग पहुंचकर किसानों के आंदोलन को जायज ठहरा रहे हैं। जिला किसान संघ के संयोजक चन्दू साहू ने सरकार की चना खरीदी नीति पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में वितरण के लिए छत्तीसगढ़ के किसानों से चना खरीदने के बजाए व्यापारियों को लाभ पहुंचाने उनसे चना खरीदा जा रहा है।
अस्पताल में अनशन
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रथम तल पर मेडिकल वार्ड में भर्ती किए गए सुदेश टीकम ने वहां भी अपना अनशन जारी रखा है। सुदेश ने अपने बेड के पास आमरण अनशन का बैनर लगा रखा है। सुदेश का कहना है कि सरकार जब तक समर्थन मूल्य में चना खरीदी की घोषणा नहीं करती है, वे अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे।
शुरू किया है चना सत्याग्रह
सरकार के इस रवैये के खिलाफ किसान संघ ने चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया है। जिला मुख्यालय में कलेक्टोरेट के सामने मुफ्त में चना बांटकर विरोध करने के बाद किसानों ने चना सत्याग्रह शुरू किया और पिछले १२ दिनों से कलेक्टोरेट के सामने धरने पर बैठे हैं।
किसानों को हो रहा नुकसान
किसान नेता सुदेश टीकम ने बताया कि सरकार ने चना का समर्थन मूल्य ४४ सौ रूपए घोषित किया है, लेकिन वह इसकी सरकारी खरीदी नहीं कर रही है। सरकार के चना नहीं खरीदने के कारण किसानों को अपनी उपज को खुले में बाजार में व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है। बाजार में किसानों को तीन हजार से ३१ सौ रूपए मूल्य ही मिल रहा है। इस तरह किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है।