जर्जर भवन से छज्जे व स्लैब गिर रहे, जान जोखिम में डालकर काम करे रहे अधिकारी-कर्मचारी
राजनांदगांव. शहर के बीचो-बीच करीब २५ साल पुराने भवन में जिला अस्पताल सहित विभिन्न कार्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें से ज्यादातर बिल्डिंग जर्जर हो चुके हैं। भवन के छज्जे व स्लैब की छबाई भी गिर रही है। ऐसे में किसी प्रकार का हादसा होने का अंदेशा बना हुआ है। इसके बाद भी जर्जर भवन में जान जोखिम में डालकर अधिकारी-कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
शहर के प्रबुद्ध वर्ग से जब 'पत्रिकाÓ ने चर्चा किया, तो उनका भी मानना है कि यहां मल्टी प्लैक्स भवन बनने से बहुत सारी सुविधाएं मिल जाएगी। शासन-प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। ऐसे में इन जर्जर हो चुके भवनों को जमींदोज कर नया मल्टी प्लैक्स बिल्डिंग बनाया जा सकता है। सुनियोजित ढंग से भवन बनने से यहां पार्किंग, व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स के साथ सभी विभाग संचालित किए जा सकते हैं। नए कॉम्प्लेक्स बनने से निगम की आय में भी वृद्धि होगी और एक बड़ा पार्किंग स्थल भी मिलेगा। ये करीब ५-६ एकड़ का एरिया होगा।
ये कार्यालय हो रहे संचालित
सीएमएचओ कार्यालय परिसर में ईएसआई (कर्मचारी राज्य बीमा) अस्पताल, दिव्यांगों के लिए सीआरसी सेंटर, खाद्य एवं औषधि नियंत्रण कार्यालय, बिलासा ब्लड बैंक, स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत- मलेरिया, कुष्ठ, नेत्र विभाग, स्मार्ट कार्ट सहित अन्य कार्यालय संचालित हो रहे हैं। यहां से जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जाने वाली दवाई सहित अन्य उपकरण व सामानों को भी रखने की व्यवस्था है। कुछ हिस्से में सरकारी क्वार्टर भी है।
सरकारी क्वार्टर भी जर्जर
यहां पहले जिला अस्पताल चल रहा था। ऐेसे में डाक्टरों के लिए क्वार्टर भी निर्मित किया गया था। बसंतपुर में नया जिला अस्पताल भवन बनने के बाद इसे सीएमएचओ कार्यालय बना दिया गया। यहां एएनएम नर्स के हास्टल की सुविधा थी। बाद में जब जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मर्ज किया गया, तो यहां फिर से जिला अस्पताल संचालित हो रहा है। यहां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भी बैठते हैं।
पार्किंग की समस्या से मिलेगी मुक्ति
यहां बड़ा सा पार्किंग स्थल बना देने से बाजार क्षेत्र में आने वाले यातायात को कंट्रोल किया जा सकता है। बाजार क्षेत्र में चार पहिया वाहनों की आवाजाही से आए दिन जाम की परेशानी होती है।
नरेश डाकलिया पूर्व महापौर ने कहा है कि शहर क जनप्रतिनिधि व प्रमुख लोगों से इस संबंध में शासन-प्रशासन को चर्चा कर पहल करनी चाहिए। सुझाव तो बढिय़ा है। इसमें आम जनता की सुविधाओं को ध्यान में रखकर कार्य किया जा सकता है।