
Vikram Yadav Health News: देश-विदेश में बांस वादन की मधुर तान से भारत की लोक संस्कृति का परचम लहराने वाले अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार विक्रम यादव आज गुमनामी, बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कभी फ्रांस, जर्मनी, रूस, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अपनी बांस वादन और बांस गीत की प्रस्तुतियों से दर्शकों की तालियां बटोरने वाले यह कलाकार आज इलाज और रोजमर्रा के खर्च के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
राजनांदगांव जिले के खैरा गांव निवासी विक्रम यादव छत्तीसगढ़ की लोक कला के उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहचान बनाई। उन्होंने लंबे समय तक देश के प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर के प्रतिष्ठित "नया थियेटर" से जुडक़र अभिनय, लोक संगीत और बांस वादन के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। नया थियेटर के साथ उन्होंने देशभर में सैकड़ों प्रस्तुतियां दीं और विदेशों में भी भारतीय लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।
विक्रम के पुत्र रंजित यादव ने बताया कि पिता को तीन साल पहले लकवाग्रस्त हुए। इसके बाद सालभर पहले से बिस्तर में आ गए हैं। अब तो भोजन भी छोड़ चुके हैं। पुत्र का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कला की छाप छोडऩे वाले व्यक्ति को सरकार ने भुला दिया है। सरकार को मदद करनी चाहिए।
बढ़ती उम्र और लगातार बिगड़ती सेहत ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं। बीमारी के कारण वे पहले की तरह कार्यक्रम नहीं कर पा रहे हैं। आय का कोई स्थायी साधन नहीं होने से आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। इलाज, दवाइयों और परिवार के खर्च की व्यवस्था करना उनके लिए कठिन होता जा रहा है।
साहित्यकार और यादव समाज के संरक्षक पवन यादव को जब अंतरराष्ट्रीय कलाकार विक्रम यादव के बीमार होने की खबर मिली तो वे मिलने गए और हाल जाना। पवन का कहना है कि लोक कलाकार केवल अपनी कला से समाज का मनोरंजन नहीं करते, बल्कि प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का काम भी करते हैं। ऐसे कलाकारों के लिए सरकार की ओर से सम्मानजनक पेंशन, नियमित आर्थिक सहायता और बेहतर चिकित्सा सुविधा तय की जानी चाहिए, ताकि उनका जीवन सम्मानपूर्वक गुजर सके।
विक्रम यादव की बांस वादन की मधुर धुन और बांस गीत की प्रस्तुति विदेश के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर चुकी है। विदेशी मंचों पर उनकी कला को खूब सराहा गया और उन्हें कई सांस्कृतिक आयोजनों में सम्मान भी मिला। लेकिन विडंबना यह है कि जिस कलाकार ने विदेशों में देश का नाम रोशन किया।