राजनंदगांव

राजनांदगाव मेडिकल कॉलेज में गंभीर लापरवाही, दो साल पहले की नसबंदी हुई फेल, महिला फिर गर्भवती

मेडिकल कॉलेज में गंभीर लापरवाही का आरोप, दो साल पहले नसबंदी के बाद महिला फिर गर्भवती हुई। परिजनों ने अस्पताल पर दबाव और धमकी देने का आरोप लगाया।
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Medical College Hospital
पेंड्री स्थित मेडिकल कॉलेज (Photo Patrika)

Medical College Hospital: राजनांदगांव के पेंड्री स्थित मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल के गायनिक वार्ड में डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां एक महिला की दो साल पहले नसबंदी के बाद वह फिर से गर्भवती हो गई, जब परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, तो डॉक्टरों ने उस समय नसबंदी नहीं करने की बात कहते हुए गर्भपात के बाद नसबंदी के लिए दबाव बनाया, लेकिन गर्भपात के चलते महिला कमजोर हो गई थी, तो परिजन बगैर नसबंदी कराए महिला को ले गए।

अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही

पीडि़त बिजनापुर निवासी महिला के पति सुमन कुमार वर्मा ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही और कथित बदसलूकी का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने बताया कि करीब दो साल पहले उनकी पत्नी का मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीजर से डिलीवरी हुई, इस दौरान डॉक्टरों ने नसबंदी कराने की सलाह दी और फार्म भी भरवाया। इलाज के बाद वे घर लौट गए। महिला जब फिर से गर्भवती हुई तो पति और परिजनों के होश उड़ गए।

पांच माह की गर्भावस्था में उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे

महिला के पति सुमन वर्मा ने बताया करीब पांच माह की गर्भावस्था में उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां गर्भपात की प्रक्रिया कराई गई। परिजनों का कहना है कि पांच माह की गर्भावस्था में गर्भपात के बाद महिला की हालत बेहद कमजोर हो गई थी। इसके बावजूद उपचार के दौरान नसबंदी कराने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया।

गायनिक वार्ड का भी मामला

ऑपरेशन से दो बच्चे होने पर महिला का नसबंदी कराने सलाह देते, अधिकतर महिलाओं की नसबंदी करा भी देते हैं, बिजनापुर से आई महिला के साथ भी यही हुआ। डॉक्टरों की माने तो महिला की नसबंदी ही नहीं की गई, तो फार्म क्यों भरवाए गए, यदि नसबंदी हुई है, तो फेल कैसे हो गई, दोनों ही मामलों में अस्पताल के गायनिक वार्ड के डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही है।

पुलिस कार्रवाई की धमकी

सुमन का आरोप है कि नसबंदी नहीं कराने पर डिस्चार्ज रोकने और पुलिस कार्रवाई की धमकी तक दी गई। मामले में एक समाजसेवी के हस्तक्षेप बाद महिला को बिना नसबंदी कराए डिस्चार्ज किया गया।

महिला के इलाज का पुराना रिकॉर्ड देखकर ही बता पाऊंगा। वैसे नसबंदी कई बार फेल हो जाती है। फिलहाल परिजनों की मांग पर महिला की नसबंदी कर दी गई है।


— डॉ. पवन जेठानी, उप अधीक्षक, एमसीएच

Updated on:
25 Aug 2026 04:31 pm
Published on:
25 Aug 2026 04:31 pm