
मवेशियों की मौत (फोटो सोर्स- AI)
Rajnandgaon Cow Accident: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में सड़क पर बैठे मवेशियों के झुंड के बीच तेज रफ्तार ट्रक घुस जाने से दर्दनाक हादसा हो गया। बसंतपुर थाना क्षेत्र के रेवाडीह स्थित राज इंपीरियल होटल के पास रविवार रात हुए इस हादसे में करीब 14 मवेशियों की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सड़क पर मवेशियों के शव बिखरे होने के कारण कुछ समय तक यातायात भी प्रभावित रहा।
जानकारी के मुताबिक, रविवार रात बड़ी संख्या में मवेशी सड़क पर बैठे हुए थे। इसी दौरान तेज गति से गुजर रहे ट्रक ने सड़क पर बैठे मवेशियों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों में भी हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति को संभाला गया। हादसे ने एक बार फिर शहर और आसपास के प्रमुख मार्गों पर खुले में घूमने वाले तथा सड़क पर बैठे मवेशियों की समस्या को सामने ला दिया है।
घटना के बाद नेशनल हाईवे की काऊ कैचर टीम और नगर निगम की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर की प्रमुख सड़कों और व्यस्त मार्गों पर इन दिनों बड़ी संख्या में गौवंश और अन्य मवेशियों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। लोगों का आरोप है कि सड़क पर मवेशियों की मौजूदगी के बावजूद उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए लगातार और प्रभावी अभियान नहीं चलाया जा रहा है। रात के समय सड़क पर बैठे मवेशी वाहन चालकों को दूर से नजर नहीं आते, जिससे हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इन दिनों शहर की कई सड़कों पर गौवंश का जमावड़ा आम नजर आ रहा है। कई जगह मवेशी सड़क के बीचों-बीच या सड़क किनारे बैठे रहते हैं। व्यस्त मार्गों पर भारी वाहनों और तेज रफ्तार यातायात के बीच इन मवेशियों की मौजूदगी कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
लोगों का कहना है कि सड़क पर बैठे मवेशियों के कारण पहले भी वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा है और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
हादसे के बाद बेसहारा और आवारा मवेशियों की पहचान, देखरेख तथा उनके लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने को लेकर पशु चिकित्सा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभागों को केवल हादसे के बाद सक्रिय होने के बजाय पहले से ही ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे मवेशी सड़कों तक न पहुंचें।
मवेशियों के लिए सुरक्षित शेल्टर, नियमित निगरानी और सड़क पर घूमने वाले पशुओं को हटाने की व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू किए जाने की जरूरत बताई जा रही है।
इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम, नेशनल हाईवे से जुड़े अमले और संबंधित विभागों से सड़क पर मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल अभियान चलाकर कुछ दिनों के लिए मवेशियों को हटाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए नियमित निगरानी और सुरक्षित व्यवस्था जरूरी है।
शहरवासियों का कहना है कि सड़क पर बैठे मवेशियों से जहां पशुओं की जान को खतरा है, वहीं वाहन चालकों की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। खासकर रात के समय तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक मवेशी आ जाने से गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
राजनांदगांव की यह घटना सिर्फ मवेशियों की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल भी खड़ा करती है। एक ओर बेसहारा मवेशियों के लिए सुरक्षित व्यवस्था की जरूरत है, तो दूसरी ओर सड़कों पर उनकी मौजूदगी रोकना भी जरूरी है। करीब 14 मवेशियों की मौत के इस हादसे ने संबंधित विभागों के सामने एक बार फिर चुनौती खड़ी कर दी है कि शहर की सड़कों को मवेशियों के जमावड़े से मुक्त करने और पशुओं को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के लिए ठोस एवं स्थायी कदम उठाए जाएं।
Updated on:
24 Aug 2026 02:56 pm
Published on:
24 Aug 2026 02:45 pm
