राजनंदगांव

Rajnandgaon News: संघर्षों को मात देकर एयर होस्टेस बनीं आदिवासी बेटी शिवानी, गांव से दिल्ली तक ऐसे पूरा किया सपनों का सफर

Chhattisgarh News: राजनांदगांव की आदिवासी बेटी शिवानी चुरेंद्र ने सीमित संसाधनों और संघर्षों के बीच मेहनत से एयर होस्टेस बनने का सपना पूरा किया।
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आदिवासी बेटी शिवानी बनीं एयर होस्टेस (photo Patrika )

Chhattisgarh News: कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो तो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियां भी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकतीं। राजनांदगांव जिले के ग्राम बड़गांव, पोस्ट गोडलवाही, थाना डोंगरगांव निवासी शिवानी चुरेंद्र ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर इसी बात को सच साबित किया है। सीमित संसाधनों और कई चुनौतियों के बीच पढ़ाई पूरी कर शिवानी ने विमानन क्षेत्र में अपना करियर बनाया और अब नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 में एयर होस्टेस के रूप में सेवाएं दे रही हैं। शिवानी की इस उपलब्धि से उनके परिवार के साथ-साथ हल्बा समाज, आदिवासी समाज और पूरे राजनांदगांव जिले में खुशी का माहौल है। उनकी सफलता को ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।

गांव से शुरू हुआ सफलता का सफर

शिवानी चुरेंद्र, रुकधन चुरेंद्र की पुत्री हैं। उनका बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता। शुरुआती दौर में उनके सामने संसाधनों की सीमाएं थीं, लेकिन पढ़ाई और करियर को लेकर उनका लक्ष्य स्पष्ट था। उन्होंने परिस्थितियों को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया और लगातार मेहनत करती रहीं। शिवानी ने अपनी प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा घुमका में हासिल की। इसके बाद उन्होंने कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई वेसलियन स्कूल, राजनांदगांव से पूरी की। स्कूल शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया और घुमका कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की।

भिलाई में लिया एयर होस्टेस का प्रशिक्षण

स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद शिवानी ने विमानन क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने भिलाई नगर में एयर होस्टेस प्रशिक्षण लिया और विमानन क्षेत्र से संबंधित शिक्षा हासिल की। एयर होस्टेस बनने का सपना पूरा करना उनके लिए आसान नहीं था। ग्रामीण परिवेश से निकलकर विमानन जैसे प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में अपनी जगह बनाना बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद शिवानी ने आत्मविश्वास बनाए रखा और प्रशिक्षण के दौरान लगातार मेहनत की। उनकी मेहनत और सीखने की ललक ने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। निरंतर प्रयास के बाद उन्होंने विमानन क्षेत्र में अपना करियर स्थापित किया और आज देश की राजधानी नई दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

आर्थिक अभाव को नहीं बनने दिया कमजोरी

शिवानी का सफर इस बात का उदाहरण है कि संसाधनों की कमी किसी व्यक्ति के सपनों को खत्म नहीं कर सकती, यदि उसके भीतर उन्हें पूरा करने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो। पढ़ाई से लेकर प्रशिक्षण और करियर बनाने तक उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। उनकी कहानी में सबसे खास बात यह है कि उन्होंने अपने लक्ष्य को लेकर लगातार प्रयास जारी रखा। उन्होंने साबित किया कि प्रतिभा, मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के सामने आर्थिक अभाव भी बड़ी बाधा नहीं बन सकता।

दिल्ली एयरपोर्ट पर दे रही हैं सेवाएं

लगातार मेहनत और प्रशिक्षण के बाद शिवानी ने विमानन क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वह नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 में एयर होस्टेस के रूप में सेवाएं दे रही हैं। गांव से निकलकर देश की राजधानी के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचने का उनका सफर परिवार और समाज के लिए गर्व का विषय है। उनकी इस उपलब्धि से यह संदेश भी मिलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां भी सही दिशा, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ बड़े सपनों को पूरा कर सकती हैं।

ग्रामीण और आदिवासी बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

शिवानी की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी उपलब्धि को ग्रामीण और आदिवासी समाज की बेटियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है। खासकर उन छात्राओं के लिए उनकी कहानी उम्मीद जगाती है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को लेकर असमंजस में रहती हैं। शिवानी ने यह दिखाया है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए परिस्थितियों से ज्यादा जरूरी लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता और लगातार मेहनत है। उन्होंने अपने करियर के लिए ऐसा क्षेत्र चुना, जिसमें प्रवेश के लिए प्रशिक्षण, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।

परिवार और समाज में खुशी का माहौल

शिवानी की उपलब्धि की खबर सामने आने के बाद उनके परिवार, समाज और क्षेत्रवासियों में हर्ष का माहौल है। लोगों ने उनकी सफलता पर खुशी जताते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। उनकी उपलब्धि को हल्बा समाज, आदिवासी समाज और राजनांदगांव जिले के लिए गौरव का विषय बताया जा रहा है। परिवार के लोगों और शुभचिंतकों का कहना है कि शिवानी ने अपनी मेहनत से न केवल परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि अपने क्षेत्र की अन्य बेटियों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।

संघर्ष से सफलता तक की कहानी दे रही बड़ा संदेश

शिवानी चुरेंद्र की कहानी यह बताती है कि सपनों को पूरा करने के लिए हमेशा बड़े शहर या बेहतर संसाधनों से शुरुआत करना जरूरी नहीं है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और व्यक्ति लगातार प्रयास करता रहे तो गांव और सीमित संसाधनों के बीच से भी सफलता की नई कहानी लिखी जा सकती है। बड़गांव की शिवानी का एयर होस्टेस बनना सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन बेटियों के लिए उम्मीद की किरण है जो परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को उड़ान देना चाहती हैं। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी को मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ने का संदेश देती है।

Updated on:
23 Aug 2026 01:16 pm
Published on:
23 Aug 2026 01:16 pm