राजकीय शोक पर बंद रखने की मांग
राजनांदगांव / गंडई पंडरिया. गंडई युवा कांग्रेस द्वारा सात दिवसीय राष्ट्रीय शोक दिवस के दौरान राज्य सरकार द्वारा संचालित अंग्रेजी एवं देशी शराब दुकान के खोले जाने पर कड़ा विरोध जताया है। एक ओर 14 अगस्त को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलराम दास टंडन जी के आकस्मिक निधन पर राज्य सरकार द्वारा 7 दिन की राजकीय शोक की घोषणा की गई है, दूसरी ओर 16 अगस्त को छत्तीसगढ़ के निर्माता कहे जाने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर 7 दिवसीय राजकीय व राष्ट्रीय शोक की घोषणा केन्द्र सरकार द्वारा की गई है।
शासकीय कार्यालय बंद रहा तो शासकीय शराब दुकान क्यों नहीं?
17 अगस्त को सभी शासकीय कार्यालय, अर्धशासकीय कार्यालय बंद रहा। वहीं दूसरी ओर शराब की दुकानें जिसे राज्य सरकार द्वारा संचालित किया जा रहा है वो इस राजकीय एवं राष्ट्रीय शोक दिवस में खुली रही, शराब की दुकाने खुली रखकर धड़ल्ले से शराब की बिक्री की है। इस तरह महान नेता के शोक दिवस में शराब भट्टी का खुला रहना राज्य सरकार के कथनी व करनी को उजागर करता है या युं कहा जा सकता है कि राज्य सरकार कहती कुछ और है करती कुछ और है। इस अवसर पर दीलिप ओगरे, रणजीत चंदेल, मोसिन खान, सुभम बघेल पुरषोत्तम यादव, जितेंद्र बंजारे, कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कांग्रेस ने किया विरोध
छुरिया. पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेई के अंत्येष्टि के दिन प्रदेश में शराब दुकानों के खुले रहने और भाजपा सरकार द्वारा शराब बेचे जाने पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। जिला कांग्रेस के प्रवक्ता राहुल तिवारी ने कहा कि शराब की काली कमाई के मोह में भाजपा सरकार अपने ही निर्देशों को भूल गयी, एक तरफ तो राज्य सरकार ने सभी शासकीय संस्थानों में उपक्रमों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था दूसरी तरफ शासकीय उपक्रम शराब दुकानों को खोल कर शराब बेची गयी। यह भाजपा और उसकी सरकार की देश के पूर्व प्रधानमंत्री और अपने ही दल के संस्थापक नेता के प्रति थोथी आदर भावना को प्रकट करता है। जिन अटल जी के नाम पर भाजपा पुष्पित पल्लवित हुई उन्ही अटल जी के निधन पर एक दिन की शराब से हो रही आमदनी को छोडऩे में भाजपाइयों को हिचक हो रही है। एक तरफ समूचा राष्ट्र दलगत भावना से ऊपर उठ कर अटल जी के निधन से शोकाकुल हो कर उन्हें अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दे रहा वहीं दूसरी ओर अटल जी के नाम सत्तासुख भोग रहे भाजपाई राष्ट्रीय शोक के लिए घोषित अवकाश के एक दिन के सामान्य शिष्टाचार को नही निभा सके। दुर्भाग्यजनक है कि खुद शराब दुकान खोल कर शराब बिकवाने वाली भाजपा के नेता जनसामान्य से अपने प्रतिष्ठानों को बंद करने की अपील भी कर रहे थे।