
राजसमंद/नाथद्वारा. नगरपालिका नाथद्वारा में बिना निविदा के सोसायटी फोर रिसर्च सर्विस एंड वाटर बोर्न डिजीज ट्रीटमेेंट (सरस्वती) उदयपुर को ४० कार्मिक लगाने का ठेका देने के लिए पालिकाध्यक्ष ने ही अनुशंषा की थी। एनजीओ के मांग पत्र पर पहले नोटशीट पर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश लिखे, फिर लिखा कि पत्रावली का अवलोकन किया गया, नियमानुसार कार्रवाई पाई गई है। यह खुलासा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा जब्त रिकॉर्ड खंगालने से हुआ। इसके लिए नगरपालिका की जलदाय शाखा के सहायक अभियंता नाथूसिंह राठौड़ द्वारा 16 जनवरी 2015 को पत्र प्रेषित किया। जिस पर अवलोकन कर आदेश देने का हवाला दिया गया। उसके बाद पालिकाध्यक्ष लालजी मीणा ने लिख दिया कि नियमानुसार कार्यवाही करें। उसके बाद एनजीओ द्वारा 40 कार्मिक लगा दिए गए। फरवरी 2015 से प्रारंभ हुए भुगतान के बाद इस कार्य के अगले महीनों के बिल का भुगतान मई 2016 आदि के शेष थे। उनको मई 2017 में प्रस्तुत किया गया। लंबे समय बाद बिल पेश करने पर कारण मांगा गया और कार्य की स्थिति, कार्य में लगे लोगों का विवरण भी नहीं मिला। ऐसी स्थिति में कार्य की जांच करने के आदेश की नोटशीट चल गई और बकाया भुगतान लंबित हो गया।
कार्मिकों की हड़ताल से खुली पोल
नाथद्वारा शहर में जल व्यवस्था के लिए लगे 40 कार्मिकों को 19 माह का भुगतान नहीं होने पर आंदोलन शुरू कर दिया। प्रति कार्मिक के पांच हजार रुपए का मानदेय तय था, मगर नगरपालिका के पास उनकी उपस्थिति संबंधी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। लंबे समय तक कार्मिकों के हड़ताल पर उतरने से पोलपट्टी सामने आने लग गई।
आयुक्त हो चुकी है ट्रेप
जल योजना में आरोपित तत्कालीन आयुक्त तनुजा सोलंकी 25 अपे्रल 2016 को हरीश सोनी से 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार हो चुकी है। फिर उसे निलंबित कर दिया गया, जो वर्तमान में जोधपुर में राजस्व अधिकारी के पद पर कार्यरत है।
गलत नहीं थी मेरी नियत
मेरे पास नोटशीट जो आई थी। उसमें आयुक्त या संबंधित अधिकारी ने यही लिखा कि कार्य नियमानुसार है। उसी को मद्ेनजर रखते हुए एवं शहर जल व्यवस्था बाधित ना हो। उसको देखते हुए मैंने हस्ताक्षर किए और बोर्ड बैठक में भी मेटर लाये थे। मेरी नियत गलत होती तो बोर्ड बैठक में नहीं रखते।
लालजी मीणा, अध्यक्ष नगरपालिका नाथद्वारा