यूरिया की किल्लत के चलते लंबे समय से चक्कर काट रहे परेशान काश्तकारों को शनिवार को उस समय राहत मिली
पीपली आचार्यान(राजसमंद). यूरिया की किल्लत के चलते लंबे समय से चक्कर काट रहे परेशान काश्तकारों को शनिवार को उस समय राहत मिली, जब गांव के एक प्राइवेट डीलर के यहां सुबह खाद से भरा ट्रेलर पहुंचा। ट्रेलर पहुंचते ही हाथों-हाथ किसानों को यूरिया खाद का वितरण शुरू कर दिया गया। लंबे समय से यूरिया खाद की अपेक्षित आपूर्ति नहीं होने के कारण कृषक वर्ग को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में पीपली आचार्यान स्थित प्राइवेट डीलर के यहां यूरिया के कुल 868 बैग पहुंचने पर शिव कुमार नवाल ने कन्हैयालाल भील की मदद से किसानों को खाद का वितरण किया। यूरिया खाद आने की सूचना मिलते ही पीपली आचार्यान के अलावा मोही, कुंवारिया, घाटी, प्रेमपुरा, बड़लिया, सनवाड़, एमड़ी, धोइंदा सहित आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में किसान यूरिया लेने के लिए मौके पर पहुंच गए। किसानों की भीड़ के चलते शाम 6 बजे तक यूरिया खाद के 600 बैग वितरित हो चुके थे।
राज्यावास गांव में रबी फसल की चल रही ऑनलाइन गिरदावरी का तहसीलदार पुष्पेंद्र सिंह कितावत ने शनिवार को खेतों में पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं 10 खेतों की गिरदावरी कर प्रक्रिया की समीक्षा की। राज्यावास के पटवारी रोहित पालीवाल द्वारा अब तक कुल 367 खसरों की ऑनलाइन गिरदावरी की जा चुकी है। पटवारी पालीवाल ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में गैर मुमकिन किस्म की भूमि जैसे रास्ता, कुआं, देवरा आदि, जिन पर फसल नहीं होती, उनकी भी गिरदावरी करना अनिवार्य है। इससे समय की अनावश्यक बर्बादी होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि गैर मुमकिन किस्म की भूमि को संस्थागत श्रेणी में शामिल कर दिया जाए, तो गिरदावरी का कार्य निर्धारित समय सीमा में आसानी से पूरा किया जा सकता है। निरीक्षण के दौरान तहसीलदार पुष्पेंद्र सिंह कितावत ने माइक के माध्यम से काश्तकारों को संबोधित करते हुए किसान गिरदावरी ऐप के जरिए स्वयं अपने खेतों की गिरदावरी करने के लिए जागरूक किया। इस अवसर पर ग्राम प्रतिहारी देवीलाल गाडरी सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।