
राजसमंद. जिला पुलिस लाइन में घोड़ों के लिए रिजका (हरी घास) आपूर्ति के भुगतान को लेकर जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लेखा कार्मिक चार माह से टकरा रहे थे। पुलिस लाइन में घुड़शाला से जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक बिल आगे बढ़ाने वाले हर कार्मिक ने परेशान किया। इससे घबराकर पीडि़त ने जब एसपी से भी मिलने का प्रयास किया, तो उसे मिलने नहीं दिया और लेखा शाखा के कार्मिकों ने गाली गलोच कर उसे हंसी का पात्र भी बना डाला।
एसीबी सूत्रों के मुताबिक पीपली आचार्यान निवासी सुखलाल कुमावत टेंडर होने के बाद अप्रेल से जून तक रिजका आपूर्ति के करीब 17 हजार रुपए के बिल का भुगतान कर दिया। इसके अलावा बारिश के मौसम में ज्यादा रिजका आपूर्ति होने जुलाई, अगस्त सितम्बर तक तीन माह के करीब 88 हजार रुपए और अक्टूबर माह के पांच हजार 700 रुपए बकाया है। बार बार तकाजा करने पर एक बिल के 29 हजार 700 रुपए का भुगतान कर दिया, मगर दो बिल के करीब 59 हजार रुपए का बिल रोक दिया। इसका भुगतान करने की एवज में सहायक लेखाधिकारी संदीप रावल ने तीन हजार रुपए की रिश्वत मांगी। बाद में ढाई हजार रुपए की रिश्वत पर सहमति बनी। पीडि़त सुखलाल ने बताया कि जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लेखा शाखा में सहायक लेखाधिकारी रावल के पास में बैठने वाले कार्मिक ने गाली गलोच करते हुए डराया कि उसे खर्चा पानी (रिश्वत) तो देना ही पड़ेगा। बताया गया कि घुड़शाला में रिजका आपूर्ति का सत्यापन कर बिल जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भेजने के लिए भी हर स्तर पर कार्मिकों द्वारा उससे रिश्वत मांगी गई। हालांकि एसीबी की जांच व सत्यापन में अभी तक एक ही कार्मिक सामने आया है, जिसने रिश्वत राशि मांगी, लेकिन अब एसीबी द्वारा भी हर एक पहलू से गहन तहकीकात की जा रही है।
एसीबी दबिश पर भागा लिपिक
पीडि़त सुखलाल ढाई हजार रुपए लेकर जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा, जहां लिपिक नरेंद्रसिंह के कहने पर ढाई हजार रुपए सहायक लेखाधिकारी संदीप रावल ने लेकर जेब में रख दिए। इसके बाद लिपिक नरेंद्र सिंह ने कहा कि कुछ खर्चे के पैसे उसे भी दो। इस पर पीडि़त सुखलाल ने जेब से पर्स निकाल कर बताया कि देख लो, सिर्फ 10 रुपए बचे है। अब अगला बिल का भुगतान होने पर आपको भी पैसा दे दूंगा। तभी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दबिश देकर सभी कार्मिकों को बिठा दिया, मगर आरोपी नरेन्द्रसिंह कलक्ट्रेट होकर फरार हो गया। इसके चलते गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
एसपी से नहीं मिलने दिया
बकाया भुगतान नहीं करने से परेशान सुखलाल ने जिला पुलिस अधीक्षक से मिलने का भी प्रयास किया, मगर कतिपय कार्मिक उसे वापस लेखाधिकारी के पास ले गए और बकाया भुगतान जल्द करने की गुजारिश की। फिर भी आश्वासन से ज्यादा कोई सुनवाई और कार्रवाई नहीं हो पाई।
जांच के बाद सख्त कार्रवाई
बिल अटकाने की मुझे कभी शिकायत नहीं की। अब विभाग स्तर पर एएसपी से विशेष जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी सामने आएगा। उस आधार पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भुवन भूषण यादव, जिला पुलिस अधीक्षक राजसमंद
हर पहलू से होगी जांच
सहायक लेखाधिकारी के रिश्वत मांगने पर रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। सत्यापन व ट्रेप के दौरान कुछ अन्य कार्मिकों की भूमिका पर संदेह है, जिनके विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राजेश चौधरी, अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक एसीबी राजसमंद