
अश्वनीप्रताप सिंह ञ्च राजसमंद. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को फसल का बीमा करवाना अब दोगुना महंगा हो गया है। बीमा कम्पनियों ने कई प्रमुख फसलों की प्रीमियम राशि बढ़ा दी है। राशि बढऩे का सीधा असर किसानों के साथ ही सरकार पर पड़ा है, क्योंकि बीमा प्रीमियम की २ से ५ फीसदी राशि ही किसान को देनी होती है शेष राशि सरकार द्वारा अनुदानित होती है। अनुदानित राशि केंद्र और राज्य सरकार आधी-आधी जमा करती हैं। राजसमंद जिले में रबी और खरीफ की दोनों प्रमुख फसलों में औसत ३६ हजार बीमे होते हैं। यहां खरीफ-2017 में 29331 किसानों ने बीमा करवाया। वर्ष 2016 खरीफ में 29074 तथा रबी में 18 76 6 किसानों ने बीमा करवाया। प्रदेश में यह आकड़ा २८ लाख से अधिक का है।
सरकार देती है लगभग पूरी राशि
प्रदेश व जिले में बोई जाने वाली अधिकतर फसलों की प्रीमियम राशि का दो प्रतिशत किसानों को देना होता है, जबकि शेष प्रीमियम का भुगतान सरकार करती है। जिले में बोई जाने वाली सिर्फ कपास की फसल की प्रीमियम राशि ५ प्रतिशत किसानों तथा शेष सरकार को देनी होती है। प्रीमियम राशि बढऩे से करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भार सरकार पर आएगा।
कपास की प्रीमियम राशि घटी
बीमा कम्पनियों ने जहां अन्य फसलों की प्रीमियम राशि दोगुणा से अधिक बढ़ाई है, वहीं कपास की राशि घटाई है। गत वर्ष ३४४० रुपए प्रति हैक्टेयर किसान को देय था, वहीं इस बार यह राशि ३१०० रुपए की गई है।
बीमे के बाद भी नहीं मिल पाती क्लेम राशि
बीमा कम्पनियों ने अपनी जेब भरने के लिए प्रीमियम राशि तो बढ़ाई है, लेकिन किसान को फसल का बीमा करवाने के बावजूद उचित क्लेम (दावा) राशि नहीं मिलती है, जिससे किसान ठगा जाता है। बीमा कम्पनी अलग-अलग फसलों पर बीमे का क्लेम पास करती हैं, जिसमें मक्का, ग्वार की फसल में ९० फीसदी, ज्वार, कपास में ८० फीसदी फसल खराब होने पर क्लेम देती है। खराबे का आकलन ब्लॉक स्तर पर होने से ज्यादातर खराबे का प्रतिशत ५० से ६० फीसदी पर ही सिमट कर रह जाता है, जिससे बीमाधारक किसान की पूरी फसल खराब होने पर भी मामूली क्लेम राशि ही मिलती है।
ये हैं नई प्रीमियम दर
किसान द्वारा देय
मक्का 820 रुपए
ज्वार 550
ग्वार 640
कपास 3100
खरीफ 2017 में देय प्रीमियम राशि
मुख्य फसल
मक्का 345
ज्वार 428
ग्वार 333
कपास 3440
नोट: राशि प्रतिहैक्टेयर में है
अधिसूचना के अनुसार करवाए है...
खरीफ फसल के लिए जारी नई अधिसूचना के अनुसार बीमा करवाए हैं। आदेश सरकार और विभाग का है। इसमें हम कुछ नहीं कर सकते।
रविंद्र कुमार वर्मा, उपनिदेशक कृषि विस्तार, राजसमंद