
इस वर्ष सूखी पड़ी गोमती।
राजसमंद. गववर्ष की तुलना में इसबार मानसून पहले आया लेकिन बारिश की बेरूखी ने लोगों को निराश किया है। जिले के कुछ हिस्सों को छोडक़र अभीतक तेज बारिश नहीं हुई। इससे जिले के आधे से ज्यादा जलाशय अभी भी खाली है। राजसमंद को भरने में मुख्य भूमिका निभाने वाली गोमती नदी इन दिनों पूरे वेग से बह रही थी जबकि इसबार नदी में धूल उड़ रही है। अगर बरसात के आकड़ों की बात करें तो गववर्ष १ अगस्त तक ५३६.५६ एमएम बारिश हो चुकी थी, जबकि इसबार अभीतक २५० एमएम औसत बारिश ही हुई है। सावन माह शुरू होने के पूर्व से ही इंद्रदेव रूठे हुए हैं, जिससे किसानों के साथ आमजन में काफी मायूसी छाई हुई है।
रीते हैं आधे से ज्यादा जलाशय
जिले के एक दर्जन से ज्यादा जलाशय अभी खाली हैं। जिनमें पानी है वह पेयजल के काम आ रहा है, जिससे उनका जलस्तर भी अभी बढऩे की जगह घट रहा है।
ब्लॉक 2017 2018
राजसमंद 344 286
नाथद्वारा 711 266
आमेट 455 215
भीम 510 302
देवगढ़ 634 257
रेलमगरा 446 226
कुंभलगढ़ 655 233
इनमें नहीं है पानी जिले में बारिश का दौर १७ जुलाई से शुरू हुआ था, लेकिन अभी इतनी बारिश नहीं हुई है कि पहाड़ी क्षेत्रों से पानी जलाशयों की ओर बहकर आए। ऐसे में जिले के छोटे-बड़े एक दर्जन से अधिक जलाशय रीते हुए हैं। इनमें रेलमगरा का भराई बांध, कुंडेली, भोपाल सागर, लालपुर, खंडेल, नीमझर, देहरिया, सांसेरा, मनोहर सागर जैसे जलाशयों में पानी नहीं है। छलक कर बंद हुआ बाघेरी जुलाई के अंतिम दिनों में नाथद्वारा क्षेत्र में बारिश होने से बाघेरी का नाका पर चारद चली, लेकिन बाद में बारिश नहीं होने से चादर चार दिन बाद ही बंद हो गई, जिससे लोगों को खासा निराश होना पड़ा, क्योंकि बाघेरी जिले सहित उदयपुर के लोगों के लिए मुख्य पिकनिक स्पॉट है। २२ जुलाई को छलक गया था रामदरवार गतवर्ष ४४ वर्ष बाद छलकी राजसमंद झील को भरने के लिए रामदरवार २२ जुलाई को ही छलक गया था, वेग भी ऐसा था कि २ दिन में पानी ने राजसमंद झील के दामन को छू लिया था। यहां के छापरखेड़ी पुलिया पर ऐतिहासिक ७ फीट की चादर तक चली थी। इसबार अगस्त का प्रथम सप्ताह बीतने को है और गोमती सूखी है।
Published on:
06 Aug 2018 04:12 pm
