
राजसमंद. मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. शिशुपाल सिंह ने कहा कि मानसिक विक्षिप्त एक बीमारी है, जो किसी के द्वारा जादू, टोने से नहीं होता है और न ही जादू टोने से इसका कोई इलाज संभव है। अगर नियमित रूप से दवा व उपचार लिया जाए, तो मानसिक विक्षिप्त बीमारी से राहत मिल सकती है। यह बीमारी किसी भी उम्र में महिला या पुरुष किसी को भी हो सकती है और उपचार से ही राहत संभव है।
वे विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के तहत आयोजित जागरुकता कार्यशाला व शिविर में छात्र छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पढ़ाई या परिवार की किसी भी समस्या से छात्र, युवा या वृद्धजन भी अवसाद से ग्रसित हो सकता है। आर्थिक परेशानी और परिवार के अन्तर्कलह से उपजे विवाद से कोई भी व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार हो सकता है, जो एक सामान्य बीमारी है। हर वक्त घबराहट महसूस करना, भूख न लगाना, चिड़चिड़ापन व नींद न आने के प्रारंभिक लक्षण है, जिसकी भनक लगते ही तत्काल संबंधित व्यक्ति को मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास ले जाना ही समझदारी है। जितने जल्दी चिकित्सक के पास ले जाएंगे, उतना ही जल्दी उपचार होकर ठीक हो सकेगा और जितनी देरी होगी, उतने ही स्वस्थ्य होने का चांस कम होता जाएगा।
यहां जागरुकता कार्यशाला
श्रीनाथ नर्सिंग कॉलेज राजसमंद, श्रीनाथजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग कॉलेज नाथद्वारा, गोवर्धन राजकीय चिकित्सालय नाथद्वारा, आरके जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीम, सेठ रंगलाल महाविद्यालय राजसमंद छात्र छात्राओं, आमजन के साथ ही जिला कारागृह में बंदियों को भी मानसिक विक्षिप्तता को लेकर जागरूक किया गया। छात्र, छात्राओं, आम लोगों व बंदियों के स्वास्थ्य की भी जांच की गई।
ग्रामीणों को बताए विक्षिप्त के अधिकार
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पीपरड़ा में विशेष शिविर आयोजित कर ग्रामीणों को मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों को कानूनी अधिकार के बारे में प्रशिक्षित किया गया। अधिवक्ता परसराम वैश्णव ने मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 की धारा 5 व धारा 23 के तहत तय अधिकारों के बारे में बताया। अधिवक्ता मुकेश ओस्तवाल ने भी विक्षिप्त व्यक्ति की समपत्ति, उसकी देखरेख व उपचार संबंधी जानकारी दी।