राजसमंद

अपनी सेवाएं ‘बेचने’ आए मोबाइल कम्पनियों के रिटेलर, लाभान्वितों को भरमाते रहे

भामाशाह डिजिटल परिवार योजना, पहला दो दिवसीय शिविर राजसमंद पंचायत समिति परिसर में लगा
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अपनी सेवाएं 'बेचने' आए मोबाइल कम्पनियों के रिटेलर, लाभान्वितों को भरमाते रहे

राजसमंद. भामाशाह डिजिटल परिवार योजना के तहत दो दिवसीय शिविर शुक्रवार और शनिवार को राजसमंद पंचायत समिति परिसर में लगा। जिले के पहले शिविर में विभिन्न मोबाइल कम्पनियों के रिटेलर लाभान्वितों को भरमाते रहे। पहले से गफलत में पड़े लोग कहीं मोबाइल खरीदने पर मजबूर हो गए, वहीं कईलोगों ने पंजीयन करवाकर मोबाइल सिम भी खरीदी। दो दिन में छह सौ से ज्यादा मोबाइल और सैकड़ों सिम बिकीं। दरअसल, सरकार की इस योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में पंजीकृत व प्रत्येक परिवार के मुखिया को सरकार की ओर से मोबाइल सुविधा से जुडऩे के लिए दो किश्तों में कुल एक हजार रुपए के अनुदान का प्रावधान है। किसी भी लाभान्वित के पास अगर पहले से मोबाइल है, तो वह दूसरी किश्त भामाशाह योजना का एप डाउनलोड कर लाभ ले सकता है। पहली किश्त बिना पंजीयन के ही खाते में जमा हो जाएगी। पैसा भामाशाह से लिंक बैंक खाते में जमा होगा। यह पैसा मोबाइल व इंटरनेट सेवा लेने के लिए दिया जा रहा है।
शिविर में विभिन्न कम्पनियों के रिटेलरों ने स्टॉल्स लगा सुबह पंजीयन शुरू किया। एक कम्पनी ने लगभग ११ सौ रुपए लेकर मोबाइल बेचे। पंजीयन कराने पर उन्हें योजना की अनुदान राशि खाते में जमा हो जाने का आश्वासन दिया। इस कम्पनी के मोबाइल में भामाशाह व सरकार की अन्य योजनाओं की मोबाइल एप पहले से मौजूद है। इस कम्पनी के मोबाइल बिक्री के विरुद्ध एक रिटेलर ने नोटिस बोर्डलगा रखा था कि योजना का लाभ लेने के लिए किसी भी कम्पनी का फोन खरीदने की जरूरत नहीं है। बिना फोन के ही 500 रुपए खाते में आ जाएंगे और शेष 500 रुपए भामाशाह एप में पंजीयन करने पर मिलेंगे। कुछ मोबाइल कम्पनी के रिटेलर भामशाह एप में रजिस्टे्रशन कर अपनी सिम और कॉलिंग-डेटा योजनाओं के बाउचर बेच रहे थे। इस दौरान यहां आ रहे लाभान्वित पूरी तरह भ्रमित थे कि आखिर उन्हें बिना मोबाइल और सिम खरीदे लाभ मिलेगा या नहीं। अधिकांश लोगों ने मोबाइल इसलिए भी खरीदे क्योंकि उनके पास कोईमोबाइल नहींथा। यह भी भरोसा था कि बाद में अनुदान राशि मिलेगी और खुद-ब-खुद उनका मोबाइल मुफ्त हो जाएगा। इस कम्पनी के मोबाइल में छह माह तक की कॉलिंग और डेटा सर्विस के वाउचर भी मुफ्त दिए जा रहे थे। परिसर में प्रशासन की ओर से लोग लाभान्वितों का भ्रम दूर करने की जहमत नहीं उठा रहे थे, जबकि रिटेलर खुलेआम लोगों को भ्रमित कर रहे थे।


क्या होगा लाभ?
मोबाइल सेवा से जुड़कर अब गरीब और पिछड़े तबके के लोग केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभ के संदेश अपने मोबाइल पर पाकर उनका खुद ही सत्यापन कर सकेंगे। लाभ नहीं मिलने या देरी होने पर सम्बंधित विभाग को शिकायत दर्ज करवा सकेंगे। लाभान्वितों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए योजना के तहत जिलेभर में शिविर लगाए जाएंगे। अगला शिविर केलवा कस्बे में 10 सितम्बर को लगेगा।


सांसद ने बांटे फोन
अवलोकन करने पहुंचे सांसद हरिओम सिंह राठौड़ के हाथों कुछ लाभान्वितों को मोबाइल फोन भी बंटवाए गए। सांसद ने लाभान्वितों और रिटेलर से योजना सम्बंधी जानकारी भी ली। इधर, शिविर प्रभारी व विकास अधिकारी मधुसूदन रतनू ने बताया कि लाभान्वितों की श्ंाकाओं का मौके पर ही समाधान किया गया।

Published on:
08 Sept 2018 09:11 pm