राजसमंद

सरकारी अनुदान के लिए उठाया लाखों का ऋण हजम : व्यवसाय के नाम ऋण, एक भी कारोबार नहीं

भूमि विकास बैंक प्रबंधक समेत तीन के विरुद्ध रिपोर्ट
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सरकारी अनुदान के लिए उठाया लाखों का ऋण हजम : व्यवसाय के नाम ऋण, एक भी कारोबार नहीं

राजसमंद. टेंट हाउस की दुकान लगाने के लिए ऋण लेने के बाद जमा नहीं कराने के बाद अवधिपार होने के बावजूद फर्जी तरीके से रदा मशीन व कटर लगाने के नाम दो नए ऋण से लाखों रुपए उठा लिए। अब भूमि विकास बैंक से तीनों ऋण पेटे करीब 25 लाख रुपए बकाया का नोटिस देखक पीडि़त के होश उड़ गए। क्योंकि वास्तविकता में न टेंट हाउस की दुकान लगी और न ही रद्दा मशीन और मार्बल कटर का कारोबार शुरू किया। फिर तीनों कारोबार के नाम पर लाखों रुपए का ऋण कतिपय फर्म के जरिये उठा लिए। बगैर व्यवसाय के ही आरोपितों राज्य सरकार से लाखों रुपए का अनुदान उठा कर हजम कर लिया। अब भूमि विकास बैंक के साथ ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी।

जानकारी के अनुसार पीपलवास, केसूली निवासी राम लाल पुत्र भैरूलाल सुथार ने नाथद्वारा थाने में कांकरोली निवासी राजेंद्र पुत्र शंकरलाल खटीक, भूमि विकास बैंक प्रबंधक जगदीश पुरोहित, बैंक कार्मिक रामेश्वर प्रसाद, श्रीनाथ इलेक्ट्रोनिक्स, इलेक्ट्रीकल्स एंड कमल इलेक्ट्रोनिक्स ट्रेडर्स धोइंदा राजसमंद, श्रीनाथ इलेक्ट्रोनिक्स, इलेक्ट्रीकल्स एंड ट्रेडर्स नाथद्वारा, वद्र्धमान ट्रेडर्स नाथद्वारा के विरुद्ध रिपोर्ट दी। बताया कि 22 नवंबर 2011 को बैंक द्वारा रामलाल को टेंट हाउस दुकान के लिए 5 लाख 90 रुपए का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसका भुगतान श्रीनाथ इलेक्ट्रोनिक्स, इलेक्ट्रीकल्स एंड कमल इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेडर्स धोइंदा को भुगतान किया। उसके बाद न तो टेंट हाउस संबंधी कोई सामग्री दी और न ही नकद रुपए दिए गए। खाली चैक पर हस्ताक्षर करवाकर किश्तों में 4 लाख 42 हजार रुपए दिए, जिसमें से 3 लाख 75 हजार रुपए जमा भी करवा दिए। इसी तरह आरोपितों ने पुराना ऋण जमा करने की एवज में 7 लाख रुपए का नया ऋण रद्दा मशीन के नाम 23 जनवरी 2014 को उठाया, जिसका भुगतान श्रीनाथ इलेक्ट्रोनिक्स इलेक्ट्रोनिक्स एंड ट्रेडर्स नाथद्वारा के नाम से उठाया, जिसमें से उसे एक रुपए भी ऋण का नहीं दिया गया। आरोपित ने धोखे से डरा, धमका व ब्लैकमेल कर तीसरी बार कटर, ड्रील मशीन, ग्राइंडर के नाम 15 लाख रुपए का ऋण 28 मार्च 2014 को जारी कर भूमि विकास बैंक से वर्धमान टे्रडर्स नाथद्वारा को भुगतान किया। फिर भी न तो नकद राशि दी और न ही जिस प्रयोजन से ऋण लिया, उस माल की आपूर्ति की गई।

बगैर एनओसी दे दिया ऋण
नियमानुसार किसी भी बैंक से कोई ऋण बकाया नहीं होने के अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद किसी भी बैंक द्वारा ऋण दिया जाता है। इस मामले में भूमि विकास बैंक में पहला ऋण बकाया होने के बाद भी दूसरी और तीसरी बाद ऋण जारी कर दिए, जिससे शाखा प्रबंधक से लेकर केशियर व अन्य कार्मिकों की कार्यशैली कठघरे में आ गई।

अनुदान भी हजम कर गए
टेंट हाउस, रद्दा मशीन और कटर व्यवसाय के नाम पर ऋण लिया, मगर भौतिक रूप से एक भी व्यवसाय नहीं हुआ। फिर भी फर्जी रिपोर्ट पेश कर राज्य सरकार से करीब 15 लाख रुपए का अनुदान भी स्वीकृत करा कर उठा लिया।

अनियमितता की करवा रहे जांच
ऋण में अनियमितता की शिकायत मिली है। इसकी विस्तृत जांच कराई जा रही है। बिना व्यवसाय के ऋण होने व सरकारी अनुदान उठाने तक पूरी जांच करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
भवानीसिंह कविया, सचिव भूमि विकास बैंक राजसमंद

Published on:
14 Sept 2018 08:45 pm