
राजसमंद. न हवा थी और न आंधी-तूफान। बारिश की बूंद भी न गिरी। फिर भी पांच पोल की विद्युत लाइन के एक पोल का इंसुलेटर जल गया और 11 हजार केवी की विद्युत लाइन का तार टूट गया। पुराना होने या खींचाव से इंसुलेटर टूट सकता है, मगर घरेलू बिजली कनेक्शन के सामान्य विद्युत भार में इंसुलेटर के जलने और तार टूटने से समूची विद्युत निगम की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसान पलेवा मगरी भील बस्ती में 11 हजार केवी विद्युत लाइन पर सिर्फ घरेलू बिजली कनेक्शन का भार है। इस बस्ती के लिए अलग लाइन होने से विद्युत भार कम या ज्यादा होने से स्पार्किंग के हालात भी नहीं बन रहे हैं। फिर भी एक पोल पर लगा इंसुलेटर जल गया, जिससे आधी रात में टूटकर विद्युत तार मुख्य सडक़ पर गिर गया और एक व्यक्ति की बेमौत हो गई। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि जब सामान्य दिनों में भी विद्युत लाइन के इंसुलेटर जल रहे हैं और तार टूट कर सडक़ पर गिर रहे हैं, तो वर्षाऋतु में तेज हवा व बारिश के दौरान क्या ये विद्युत लाइन सलामत रह जाएगी।
नहीं हो पा रही लाइनों की मॉनिटरिंग
शहर-देहात की विद्युत लाइनों की नियमित मॉनिटरिंग को लेकर लाइनमैनों के पेट्रोलिंग की भी व्यवस्था है। कम से कम एक सप्ताह में प्रत्येक लाइन का भौतिक सत्यापन करना आवश्यक है। विद्युत निगम में स्टाफ की कमी के चलते पेट्रोलिंग अब बंद सी हो गई है।
इंसुलेटर जलने के ये मुख्य कारण
विद्युत विशेषज्ञों के मुताबिक वर्षों पुराना होने पर तडक़ कर इंसुलेटर जल गया। विद्युत तार इंसुलेटर के चारों ओर कसकर बंधा नहीं होने की स्थिति में भी स्पार्किंग से इंसुलेटर जलने की संभावना रहती है। लाइन पर विद्युत भार बढऩे की स्थिति में भी इंसुलेटर गर्म होकर जल सकता है। बारिश के दौरान पानी गिरने एवं तेज हवा के दौरान तार के बार बार रगड़ लगने से इंसुलेटर के टूटने की संभावना रहती है। कई बार कुछ नए इंसुलेटर भी गुणवत्ता ठीक नहीं होने की स्थिति तडक़ सकते हैं, मगर ऐसी स्थिति सौ में से एक की ही संभावना रहती है।
विशेषज्ञ बोले - इंसुलेटर की गुणवत्ता कमजोर
इंसुलेटर कभी भी किसी भी वक्त जल सकता है। तेज हवा व बारिश के वक्त ज्यादा खतरा रहता है। इसलिए तो मानसून पूर्व रखरखाव किया जाता है। इंसुलेटर जलने में कोई तकनीकी फॉल्ट नहीं है। यह जरूर है कि रखरखाव पर नियमित ध्यान रखें, तो कई हद तक इस तरह के हादसों से बच सकते हैं। सामान्य दिनों इंसुलेटर जलने में इंजीनियरिंग डिफॉल्ट नहीं है, बल्कि इंसुलेटर की गुणवत्ता कमजोर हो सकती है।
वाईके बोल्या, पूर्व अधीक्षण अभियंता विद्युत निगम राजसमंद
इंसुलेटर जलने से टूटा तार
पोल पर लगा इंसुलेटर जलने से तार टूट गया। सुबह सूचना मिलते ही बिजली आपूर्ति बंद करवा दी। बाद में नया इंसुलेटर लगाकर विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी। क्षेत्र की विद्युत लाइन सही व सामान्य है। इंसुलेटर जलना एक आकस्मिक घटना है।
कैलाश खींची, सहायक अभियंता विद्युत वितरण निगम राजसमंद