राजसमंद

वृद्धजन बोले- पहले बनती थी शराब, फिर चार दशक चला आबकारी दफ्तर

भीम में आबकारी विभाग की बेशकीमती जमीन बेचने का मामला, खंडहर होने पर भी विभाग ने नहीं ली सुध
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वृद्धजन बोले- पहले बनती थी शराब, फिर चार दशक चला आबकारी दफ्तर

भीम. आजादी से पहले अंंगे्रजी शासन में गुलाब केसर नामक शराबी बनाई जाती थी और तत्कालीन शासन द्वारा चुंगी (सीमा शुल्क) वसूली जाती थी। लंबे समय तक वेयर हाउस रहा। टॉडगढ़ से राजसमंद आवाजाही का मुख्य रास्ता भी यही था और अक्सर लोग डेरा डाल कर रात्रि विश्राम करते थे, जिससे उक्त जगह का नाम पड़ाव पड़ गया, जहां चार दशक तक आबकारी विभाग का कार्यालय संचालित हुआ। तत्कालीन विधायक लक्ष्मी कुमार चुंडावत द्वारा देवगढ़ में नया भवन बनाने से भीम से आबकारी थाना देवगढ़ में स्थानान्तरित हो गया। करीब दो से ढाई दशक से भवन बेकार पड़ा रहने से खंडहर मे तब्दील हो गया और आबकारी विभाग ने मरम्मत की सुध नहीं ली। यह खुलासा भीम के पड़ाव में आबकारी विभाग की जमीन के आस पड़ोस में रहने वाले लोगों से परिचर्चा करने पर हुआ। बताया कि आबकारी भवन के बगल से से हाइवे बना। फिर आबादी विस्तार होने पर हाइवे कुछ दूर आगे बढ़ गया। बताया कि आजादी के बाद आबकारी का गोदाम था और शराब बिकती थी। इसी गोदाम से केसर शराब कांच की बोतलों में भरकर पूरे मेवाड़ क्षेत्र में आपूर्ति की जाती थी।

क्या बोले पड़ोसी, उन्हीं की जुबानी
शराब गोदाम संचालित होते देखा
वर्ष 196 0 से 70 तक आबकारी कार्यालय देखा है, जहां शराब गोदाम संचालित होता था। बाद में आस पड़ोस के लोगों ने भवन का थोड़ा हिस्सा गिराकर दुकानें बना दी।
सम्पतराज शर्मा, वृद्धजन भीम

इंस्पेक्टर बैठते मैंने देखा
वर्ष 1995 में लसानी के इंसपेक्टर पदमसिंह यहां बैठते थे। मगर मुझे यह नहीं मालूम कि वे आबकारी विभाग के थे या महाराणा के अदमी। उन्हें तनख्वाह कौन देता था, यह भी नहीं पता।
फरीद भाई, 73 वर्षीय पड़ोसी भीम

पहले में मेवाड़ के चूंगी (डांग) वसूल की जाती थी। वर्ष 196 0 से 70 के मध्य शराब बिक्री व गोदाम बंद हो गया। तत्कालीन विधायक लक्ष्मी कुमारी चुंडावत द्वारा आबकारी विभाग कार्यालय देवगढ़ ले जाया गया और भीम में आबकारी कार्यालय बंद हो गया।
डाऊसिंह चौहान, शिक्षाविद् भीम

बरामदा गिराकर दुकानें बनाई
आबकारी कार्यालय देवगढ़ शिफ्ट होने के बाद किसी ने सुध नहीं ली। इसके चलते लोगों ने भवन का कुछ हिस्सा बरामदा गिराकर दुकानें बना दी। करीब दस वर्षों तक आबकारी कर्यालय इंडिया की तलाई में किराए के भवन में चला।
गोपालसिंह पीटीआई, भीम

भवन 200 वर्ष पुराना था
भवन करीब दो सौ वर्ष पहले अंगे्रजी रियासत के जमाने का है। उक्त भवन की मरम्मत को लेकर आबकारी विभाग से पत्राचार हुआ है। इससे ज्यादा जानकार नहीं है।
केआर मीणा, सहायक अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग भीम

पहले बनती थी शराब
पुराने समय में यह भवन महाराणा का था तथा शराब बनती थी। पहले यहां महाराणा का आदमी बैठता था।
जवरीलाल दक, 81 वर्षीय पूर्व सरपंच और जमालुद्दीन 75 वर्षीय

आबकारी कार्यालय चलते देखा
पहले आबकारी कार्यालय चलते देखा। बाद में वर्ष 2000 तक शराब दुकान चली। महाराणा के बारे में कुछ नहीं पता। एक विद्यालय पहले महाराणा के नाम पर था, जिसे बाद में राजकीय मे बदला गया।
अमरसिंह, पूर्व सरपंच भीम

Published on:
29 Oct 2018 11:50 am