तारबंदी योजना के अनुदान का हश्र, -लघु एवं सीमांत किसानों को मिलना था लाभ
राजसमंद. किसानों की फसल सुरक्षा की दृष्टी से सरकार ने गतवर्ष तारबंदी योजना लागू की। योजना के तहत कृषि विभाग को जिले में ६ हजार मीटर तारबंदी पर लघु तथा सीमांत किसानों को ५० फीसदी अनुदान देना था, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते जिले में महज ४४६ मीटर तारबंदी पर ही दो किसानों का अनुदान पारित हुआ। जबकि यहां अधिकतर किसानों के खेतों पर तारबंदी है, लेकिन उन्हें अनुदान नहीं मिल पाया।
यह है योजना
२१ जुलाई २०१७ को प्रदेश सरकार ने आवारा मवेशियों, रोजड़ों से किसानों की फसल बचाने के लिए तारबंदी योजना लागू की। योजना का लाभ आधा हेक्टर भूमि वाले किसानों को मिलता था। अनुदान लेने के लिए किसानों को विभाग के सहायक निदेशक को ऑनलाइन आवेदन करना था तथा खेत पर तारबंदी करवाकर उसका बिल लगाकर ५० प्रतिशत या ४० हजार रुपए जो भी कम हो अनुदान मिलना था। इसमें किसान को १ मीटर तारबंदी पर १०० रुपए का अनुदान देय था।
महज दो किसानों को मिला लाभ
योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक से दर्जनों किसानों ने आवेदन किया, लेकिन मॉनिटरिंग के अभाव में जिले के महज दो किसानों को ही इसका लाभ मिला। इसमें आमेट क्षेत्र के एक किसान को २८० मीटर तारबंदी करवाने पर २८ हजार रुपए तथा रेलमगरा क्षेत्र के किसान को १६० मीटर तारबंदी पर १६६०० रुपए का अनुदान स्वीकृत हुआ है।
छह लाख मिलते, ४४ हजार ही मिले
विभाग ने अगर इसमें तत्परता दिखाई होती और लक्ष्य प्राप्त किए होते तो जिले के किसानों को करीब ६ लाख रुपए का अनुदान मिलता। लेकिन जिले के किसानों को महज ४४ हजार ६०० रुपए का अनुदान ही मिला है।
किसानों ने समय से नहीं की...
किसानों ने आवेदन तो किए थे, लेकिन समय से उन्होंने प्रक्रिया पूरी नहीं की, इससे प्रगति कमजोर रही है।
डॉ. रविंद्र कुमार वर्मा, उपनिदेश कृषि विस्तार, राजसमंद