तीन किलोमीटर के दायरे में चार आयुर्वेद औषधालय, आउटडोर 100 से भी कम चारों औषधालयों को सर्जरी की दरकार, चिकित्सक नहीं तो कहीं नर्सिंग स्टाफ की कमी औषधालयों को मर्ज कर बड़ा चिकित्सालय बनाने की जरूरत, आमजन को मिलेगा फायदा
राजसमंद. देश की सबसे प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को कोरोना के बाद नया जीवन मिला है। इसके बाद से आमजन का रूझान आयुर्वेद की ओर फिर से बढ़ा है और बढ़ता ही जा रहा है। इसके बावजूद आयुर्वेद विभाग और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण जिला मुख्यालय पर तीन किलोमीटर के दायरे में संचालित चार आयुर्वेद चिकित्सालय एवं औषधालय का लाभ आमजन को नहीं मिल रहा है। इसका मुख्य कारण चिकित्सक नहीं हैं तो कहीं पर नर्सिग स्टाफ की कमी के साथ आनन-फानन में इन्हें खोला जाना माना जा रहा है। इन चारों का आउटडोर बामुश्किल 100 से भी कम है। ऐसे में इन चारों को मिलाकर एक बड़ा सर्वसुविधा युक्त चिकित्सालय बना दिया जाए तो आमजन लाभान्वित हो सकते हैं। राजस्थान पत्रिका की टीम ने आयुर्वेद के चारों चिकित्सालय और औषधालय की जानें हालात।
गणेश नगर स्थित टेकरी पर राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय का शुभारंभ 2017 में हुआ था। यहां पर क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा इकाई का शुभारंभ 16 जनवरी 2019 को किया गया। ऐसे में इंडोर एवं क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा इकाई के 10 पलंग है। यहां पर एक भी रोगी भर्ती नहीं किया जाता है। तीन चिकित्सक के पदों में सिर्फ दो भरे हुए हैं, यहां स्वीकृत चार नर्स-कम्पाउडर के सभी पद खाली है, सिर्फ एक महिला कम्पाउडर को डेपूटेशन पर लगा रखा है। इसके कारण रोगियों को भर्ती नहीं किया जाता है। सुनसान जगह बना होने और कनेक्टिविटी के अभाव में बामुश्किल 15-20 का आउटडोर रहता है। यहां पर कई बार चोरी हो चुकी है।
आर.के.राजकीय चिकित्सालय के निकट राजकीय आयुर्वेद औषधालय कांकरोली के नाम से संचालित है। इसमें दो चिकित्सक के पदों में से मात्र एक पद भरा हुआ है। नर्स-कम्पाउडर के दोनों पद भरे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां का बामुश्किल आउटडोर 20-25 के करीब रहता है, चिकित्सक के अवकाश पर होने पर नर्स-कम्पाउडर के भरोसे औषधालय संचालित होता है। यहां पर कार्यरत चतुर्थश्रेणी कर्मचारी भी लम्बे समय से अनुपस्थित चल रहा है। इसके कारण सुमचित लाभ नहीं मिल रहा है।
धोईंदा स्थित राजकीय बालिका स्कूल के निकट राजकीय आयुर्वेद औषधालय धोईंदा संचालित किया जा रहा है। यहां पर एक चिकित्सक का पद भरा हुआ है, जबकि यहां पर कार्यरत नर्स पिछले डेढ़ साल से उदयपुर में डेपूटेशन पर है। चतुर्थश्रेणी का पद भी खाली है। ऐसे में यहां का बामुश्किल 8-10 का आउटडोर रहता है। चिकित्सक के अवकाश पर होने पर रोगियों को निराश लौटना पड़ता है।
राजनगर स्थित सिटी डिस्पेंसरी के निकट राजकीय आयुर्वेद औषधालय का संचालन डेपूटेशन के सहारे हो रहा है। यहां पर चिकित्सक की एकल पोस्ट होने के कारण तीन दिन के लिए डेपूटेशन पर तैनात कर रखा है। कम्पाउडर का पद भी खाली है। ऐसे में स्वयं अंदाजा लगाया जा सकता है, यहां पर सिर्फ खानापूर्ति के अलावा कुछ नहीं हो रहा है। इसमें राजकीय अवकाश आने पर तो स्थिति विकट हो जाती है। इसके कारण आउटडोर भी नाममात्र का रहता है।
जिला मुख्यालय पर संचालित चारों आयुर्वेद औषधालय और चिकित्सालय में आउटडोर कम रहने का मुख्य कारण रिक्त पद है। जिले में 298 चिकित्सक, कम्पाउडर और चतुर्थश्रेणी के पद स्वीकृत है, वर्तमान में सिर्फ 134 ही कार्यरत है। डेपूटेशन से काम चलाया जा रहा है। जिला चिकित्सालय सुनसान जगह पर बना होने के कारण कई बार चोरियां हो चुकी है, नर्स कम्पाउडर के पद खाली होने के कारण उसमें रोगियों को भर्ती नहीं किया जाता है। धोईंदा में तैनात नर्स उदयपुर में डेपूटेशन पर कार्य कर रही है।