
रेलमगरा. सकरावास के राउमावि परिसर में निर्माणाधीन कक्षा कक्ष एवं बरामदे की छत रविवार को अचानक से भरभरा कर धराशायी हो गई। भवन के गिरने से हुए धमाके की आवाज को सुन मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई। गनीमत रही कि रविवार का अवकाश होने से विद्यालय में कोई नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना के वक्त कारीगर एवं श्रमिक भवन के भीतर ही काम कर रहे थे, लेकिन वह भी बाल-बाल बच गए।
डीएमएफ.टी मद से स्वीकृत हुए 27 लाख रुपए की लागत से रमसा के तहत दो कक्षा कक्ष, लाईब्रेरी कक्ष एवं इनके आगे बरामदा निर्माण करने का निर्णय लिया गया। कार्य का ठेका चित्तौडग़ढ़ की फर्म हरिओम सेल्स को निर्धारित राशि से कुछ कम दर में दे दिया गया। इसके बाद निर्माण शुरू होने से पूर्व विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में काम शुरू कराने के साथ ठेकेदार को गुणवत्ता बनाए रखने के दिशा-निर्देश जारी किए गए। करीब छह माह पूर्व ठेकेदार ने यहां निर्माण शुरू करवाया, जिसके तहत भवन की छत करीब एक माह पूर्व आरसीसी में डाल दी गई। छत की बल्लियंा खुलने के बाद वर्तमान में यहां दीवारों पर प्लास्तर का कार्य किया जा रहा था। इसी दौरान रविवार सुबह यह घटना हो गई। दीवारों के दरकने एवं छत से कंकरीट गिरते देख भवन के भीतर कार्य कर रहे श्रमिक एवं कारीगर कक्षों के पिछवाड़े में बनी खिड़कियों से निकलकर दूर भाग गए। इसके बाद कुछ ही क्षणों में भवन की छत धराशायी हो गई। छत गिरने से कक्ष में पड़े लोहे के पाइप एवं पायड़ भी धराशायी हो गए।
भवन धराशायी होने की घटना के दिन रविवारीय अवकाश था, जिससे एक भी छात्र-छात्रा विद्यालय में मौजूद नहीं थे। इससे बड़ा हादसा टल गया। निर्माणाधी परिसर में कच्चा मैदान होने से अधिकांश बच्चे यहीं खेलते रहते हंै।
ठेकेदार ने छत बढ़ाई,पिलर को नहीं किया मजबूत
विद्यालय का निर्माणाधीन भवन गिरने का कारण बरामदे के पिलर का कमजोर होना बताया जा रहा है। भवन का निर्माण शुरू होने से पूर्व प्रबंधन समिति एवं रमसा के निर्देशों के तहत पूर्व में बने बरामदे की समानान्तर ही बरामदे का निर्माण कराने का निर्णय लिया गया। ठेकेदार ने निर्देशों की अवहेलना करते हुए बरामदे की छत की चौड़ाई को 7 से बढ़ाकर 10 फीट कर दिया, लेकिन इसके लिए ईंटों से बनाए गए खंभों की चौड़ाई को नही़ बढ़ाया गया। 15 गुणा 15 ईंच की चौड़ाई में ईंटों से बने इन खंभों पर उनकी क्षमता से अधिक भार वाली छत का वजन पड़ा, जिससे यह हादसा होने का आशंका जताई जा रही है। वहीं, ग्रामीणों ने भवन के धराशायी होने के पीछे निर्माण सामग्री में गुणवत्ता की कमी होने के आरोप भी लगाए हैं।
बारिश के बीच डाली छत
ठेकेदार को पहले ही ईंटों में बरामदे के खंभों का निर्माण करने के लिए मना कर दिया गया, लेकिन उसने नियमों की दुहाई देते हुए ईंटों में खंभों का निर्माण किया। वहीं, भवन की छत बारिश होने के दौरान डाली गई, जिसके लिए मना किया था पर काम नहीं रोका गया।
रामचंद्र अहीर, अध्यक्ष विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति, सकरावास
घटिया सामग्री से गिरा भवन
निर्माण सामग्री में गुणवत्ता की कमी एवं ईंटों के खंभे बनाए जाने से यह हादसा हुआ है। मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी के विरुद्ध कार्यवाही की जानी चाहिए।
किसनलाल जाट, विधायक प्रतिनिधि, मदारा
निर्माण में गुणवत्ता का पूर्ण रूप से खयाल रखा गया। विभागीय निर्देशों का पालन करते हुए ही निर्माण किया गया। अब विभाग के निर्देशों की पालना करते हुए आगामी कार्य का निर्णय लिया जाएगा।
मनीष तिवाड़ी, ठेकेदार हरिओम सेल्स चित्तौडग़ढ़
विभाग को मामले की जानकारी दे दी गई है।
भैरूलाल सरगरा, कार्यवाहक संस्था प्रधान, राउमावि, सकरावास
दुर्भाग्य पूर्ण घटना
निर्माण में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है। यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
सचिन्द्र शर्मा, सहायक अभियंता, रमसा