
Rajasthan : नाथद्वारा. श्रीनाथजी के मंदिर में आषाढ़ी तौलते मंदिर के पंड्या व खर्च भंडार के अधिकारी। फोटो पत्रिका
Rajasthan : नाथद्वारा में पुष्टिमार्गीय प्रधानपीठ प्रभु श्रीनाथजी की हवेली में आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा पर निभाई जाने वाली सदियों पुरानी परंपरा 'आषाढ़ी तौलना' इस बार भी पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। इस पारंपरिक तौल के आधार पर इस वर्ष अच्छी पैदावार और सामान्य से अधिक वर्षा के संकेत मिले हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार आगामी वर्ष कृषि और अधिकांश जिंसों के लिहाज से शुभ रहने की संभावना है। शुक्रवार सुबह ग्वाल दर्शनों के समय धान्य और अन्य सामग्रियों को दोबारा तौलने के बाद यह अनुमान सामने आया। मुख्य पंड्या परेश नागर ने बताया कि परंपरा के अनुसार मंदिर के खर्च भंडार में वर्षभर उपयोग में आने वाले धान्य और अन्य वस्तुओं की तौल की जाती है।
तौल के आधार पर अधिकांश जिंसों में बढोतरी के संकेत हैं, जबकि गुड़, नमक तथा मनुष्य और पशुओं की संख्या में कमी के संकेत बताए गए हैं। हरा मूंग, उड़द, सरसों और घास की स्थिति सामान्य रहने का अनुमान है।
इसका उद्देश्य केवल श्रीनाथजी की सेवा में किसी सामग्री की कमी नहीं होने देना ही नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और व्यापार की संभावित स्थिति का भी आकलन करना है। इस बार के परिणामों के अनुसार वर्षा सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। अनुमान के मुताबिक आषाढ़ में तीन आना, श्रावण में पांच आना, भाद्रपद में पांच आना और आसोज में दो आना वर्षा का योग बन रहा है। साथ ही पूर्व दिशा से अनुकूल वायु प्रवाह के संकेत भी मिले हैं।
आषाढ़ी तौल की इस अनूठी परंपरा में हरा मूंग, मक्का, बाजरा, ज्वार, तिल्ली, गेहूं समेत 27 प्रकार की धान्य एवं भौतिक सामग्रियों को अलग-अलग पात्रों में भरकर मुख्य पंड्या और खर्च भंडारी की देखरेख में तौला जाता है। इन्हें खर्च भंडार में सुरक्षित रखा जाता है और निर्धारित तिथि पर तौलकर वस्तुओं में हुई वृद्धि या कमी के आधार पर फसल, वर्षा, धन-धान्य, पशुओं के चारे और प्राकृतिक परिस्थितियों का अनुमान लगाते हैं।
वैसे अगर मौसम विभाग की मानें तो इस बार मानसून सीजन के आषाढ़ माह के दौरान देश में बारिश सामान्य औसत से 14 प्रतिशत कम रही। जयपुर मौसम केंद्र का तर्क है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में दो प्रमुख मौसम तंत्र सक्रिय हुए हैं। पहला सिस्टम गुजरात के रास्ते गुजरने से राज्य में अच्छी बारिश हुई थी। फिलहाल पूर्वी भारत के ऊपर बना अवदाब छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के ऊपर सक्रिय है। जैसे-जैसे यह सिस्टम मध्यप्रदेश से आगे बढ़कर राजस्थान के करीब पहुंचेगा, दक्षिण-पूर्वी और दक्षिणी जिलों में बारिश की गतिविधियां तेज होंगी। शेष क्षेत्रों में मध्यम बारिश का अनुमान है।
Updated on:
31 Jul 2026 04:40 pm
Published on:
31 Jul 2026 04:37 pm
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