मातृकुंडिया बांध के डूब क्षेत्र में किसानों का धरना मंगलवार को लगातार 21वें दिन भी जारी रहा।
रेलमगरा (राजसमंद). मातृकुंडिया बांध के डूब क्षेत्र में किसानों का धरना मंगलवार को लगातार 21वें दिन भी जारी रहा। अपनी भूमि, फसल और मुआवज़े से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलनरत किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की और चेताया कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा। उधर, बनास नदी में तेज़ी से बढ़ी जल आवक के चलते मातृकुंडिया बाँध का जलस्तर निर्धारित सीमा से ऊपर पहुँच गया। सुरक्षा की दृष्टि से सोमवार देर शाम विभाग ने बाँध के पाँच गेट खोल दिए, जिससे अतिरिक्त पानी की निकासी शुरू की गई। देर रात जलस्तर सामान्य होते ही गेट बंद कर दिए गए, लेकिन विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि जल आवक बनी रही तो पुनः गेट खोलने की प्रक्रिया दोहराई जा सकती है।
बाँध से छोड़े गए पानी ने मातृकुंडिया क्षेत्र के कई गांवों के खेतों को जलमग्न कर दिया। प्रभावित किसान अब अपनी फसलें बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार राहत देने की बात करती है, वहीं पानी छोड़ने से हमारी फसलें बर्बाद हो रही हैं।
संभागीय आयुक्त के निर्देश पर गठित सर्वे दल मंगलवार को मातृकुंडिया बाँध के आसपास के धुलखेड़ा और जवासिया गांवों में पहुँचा। दल ने सीपेज (जल रिसाव) की गंभीर स्थिति का जायज़ा लिया। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2021 से 2023 के बीच सीपेज रोकने के लिए करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से कार्य करवाया गया, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही और विभागीय उदासीनता के कारण समस्या सुलझने के बजाय और बढ़ गई। ग्रामीणों के अनुसार, ठेकेदार ने बांध की पाल की खुदाई कर उसमें कच्ची मिट्टी भर दी, जिससे पानी के रिसाव की मात्रा बढ़ गई। सीपेज जल निकासी के लिए बनाए गए नालों का स्तर भी गलत रखा गया, जिसके कारण पानी खेतों में ही फैलकर फसलें चौपट कर रहा है। भैरूनाथ मंदिर परिसर में दो फीट तक सीपेज पानी भरा रहता है, जिसे ग्रामीण पंपों की मदद से बाहर निकालते हैं। जैसे ही पंप कुछ समय के लिए बंद होता है, मंदिर फिर से पानी में डूब जाता है। श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने सर्वे दल से उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मंगलवार को बांध के गेट खुलने से परशुराम कुंड से होते हुए आरणी मार्ग पर स्थित एनिकट तक पानी का तेज़ बहाव पहुंच गया। दोपहर में एक ऑल्टो कार चालक इसी रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन बहाव तेज़ होने और मार्ग ओवरफ्लो होने से कार अनियंत्रित होकर एनिकट में जा गिरी। कार गिरते ही उसमें सवार लोग किसी तरह तैरकर बाहर निकल आए, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। सूचना मिलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुँचे और क्रेन की मदद से कार को बाहर निकाला गया।
धरनास्थल पर किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल सर्वे कराकर औपचारिकता निभा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में अब भी पानी भराव और फसल नुकसान की स्थिति बनी हुई है, परंतु मुआवज़ा या राहत की कोई ठोस पहल नहीं की गई। किसानों ने चेताया कि जब तक उनकी सभी मांगें मुआवज़ा, पुनर्वास और दोषियों पर कार्रवाई पूरी नहीं होतीं, धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।