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एक माह से बंद एक्स-रे मशीन से मरीज परेशान, निजी क्लीनिकों का लेना पड़ रहा सहारा

Kelwa CHC News
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केलवा. सामुदायिक चिकित्सालय में रोज सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं, जांच सुविधा ठप होने से बढ़ी दिक्कतकेलवा. क्षेत्र स्थित स्व. भेरूलाल बोहरा सामुदायिक चिकित्सालय में लगभग एक माह से एक्स-रे मशीन बंद होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में पहुंचने वाले मरीजों को मजबूरी में निजी क्लीनिकों का सहारा लेना पड़ रहा है। क्षेत्र का यह सामुदायिक चिकित्सालय आसपास की करीब 11 पंचायतों आत्मा, बामन टुकड़ा, देवपुरा, मादड़ी देवस्थान, पड़ासली, तलाई, धायला, खटामला, सियाणा और जैतपुरा सहित कई गांवों के लिए मुख्य चिकित्सा केंद्र है। यहां रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन एक माह से एक्स-रे मशीन खराब होने के कारण मरीजों को समय पर जांच सुविधा नहीं मिल पा रही है।

माइनिंग एरिया होने से बढ़ जाती है एक्स-रे की जरूरत

केलवा क्षेत्र माइनिंग एरिया होने के कारण यहां आए दिन खदानों और पत्थर के काम में लगे मजदूरों को चोट लगने की घटनाएं होती रहती हैं। खदानों में काम करने वाले मजदूरों को अक्सर हाथ-पैर में चोट, हड्डी में दरार या फ्रैक्चर जैसी समस्याएं हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में एक्स-रे जांच बेहद जरूरी होती है।ग्रामीण मदनलाल, शांतिलाल, किशनलाल, कमलेश, महेंद्र कुमार और धर्मचंद सहित कई लोगों ने बताया कि मशीन बंद होने से मरीजों को तुरंत जांच नहीं मिल पाती।

गरीब मरीजों पर पड़ रहा अतिरिक्त आर्थिक बोझ

मरीजों ने बताया कि निजी क्लीनिकों में एक एक्स-रे कराने के लिए करीब 300 से 400 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। एक दिन में कई मरीजों को यह जांच करवानी पड़ती है, जिससे गरीब परिवारों की जेब पर सीधा असर पड़ता है।

इनका कहना है

लगभग 25 दिनों से एक्स-रे मशीन खराब पड़ी हुई है। इस संबंध में तकनीशियन को सूचना दे दी गई है। मशीन में कुछ पार्ट्स की गड़बड़ी होने के कारण उसे ठीक करने में समय लग रहा है। जैसे ही आवश्यक पार्ट्स उपलब्ध होंगे, मशीन को ठीक करवा दिया जाएगा और मरीजों को फिर से एक्स-रे की सुविधा मिलने लगेगी।

- सुनील निठारवाल, प्रभारी, सामुदायिक चिकित्सालय केलवा

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को समय-समय पर अस्पताल का निरीक्षण करना चाहिए ताकि व्यवस्थाओं में सुधार हो सके। यदि प्रशासन अस्पताल की व्यवस्थाओं पर ध्यान दे तो केलवा क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को बेहतर और समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकती है। अस्पताल में एक्स-रे मशीन जैसी मूलभूत सुविधा का लंबे समय तक बंद रहना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

- कमलेश रेगर, सामाजिक कार्यकर्ता, केलवा

चिकित्सालय में हो रही समस्याओं को लेकर क्षेत्र की विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी को भी अवगत करा दिया गया है। अस्पताल में एक्स-रे मशीन बंद होने सहित अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी जनप्रतिनिधि तक पहुंचा दी गई है। यहां लघु कटर उद्योग में भी कई श्रमिक कार्य करते हैं जिन्हें हर समय उपचार की जरूरत पड़ती है। अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए, जिससे मरीजों को राहत मिल सके।

- नानालाल सिंधल, अध्यक्ष, जिला मार्बल कटर एसोसिएशन राजसमंद

सामुदायिक चिकित्सालय भाजपा सरकार की गुटबाजी के कारण अव्यवस्था और लापरवाही का शिकार होता नजर आ रहा है। स्थानीय भाजपा जनप्रतिनिधियों और चिकित्सकों के बीच आपसी खींचतान और गुटबाजी के कारण अस्पताल की व्यवस्थाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसका खामियाजा सीधे तौर पर गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

- हरि सिंह राठौड़, पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजसमंद

केलवा क्षेत्र माइनिंग एरिया होने के साथ ही आसपास की करीब 11 पंचायतों के ग्रामीण यहां चिकित्सा सेवाएं लेने के लिए आते हैं, लेकिन लंबे समय से जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण अस्पताल की व्यवस्थाओं की सही तरीके से देखरेख नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में संसाधन भरपूर हैं और व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण किया जाए तो क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं।

- तनसुख नरेंद्र बोहरा, समाजसेवी

केलवा पंचायत बड़ी पंचायत होने के साथ-साथ आसपास की कई पंचायतों के लोग यहां इलाज के लिए आते हैं। इसके अलावा माइनिंग क्षेत्र के मजदूर भी बड़ी संख्या में इस अस्पताल पर निर्भर रहते हैं, लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से अस्पताल में शीघ्र आवश्यक डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

- दिग्विजय सिंह राठौड़, पूर्व सरपंच केलवा ने कहा कि

इस समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता भी अपनाना पड़ सकता है।

महेंद्र कोठारी, अपेक्स समाजसेवी, केलवा

Updated on:
16 Mar 2026 02:24 pm
Published on:
16 Mar 2026 02:24 pm