राजसमंद

मनो चिकित्सक डॉ. शिशुपालसिंह बोले- विक्षिप्त का इलाज कराए, झाड़-फूंक में न फंसे

देवगढ़ के राउमावि में अंधविश्वास पर जागरुकता कार्यशाला, रंग लाया पत्रिका का अभियान
2 min read
Rajsamand,Rajsamand news,Rajsamand Hindi news,Rajsamand local news,rajsamand news in hindi,rajsamand latest hindi news,rajsamand latest hindi news rajsamand,Latest hindi news rajsamand,
मनो चिकित्सक डॉ. शिशुपालसिंह बोले- विक्षिप्त का इलाज कराए, झाड़-फूंक में न फंसे

राजसमंद. राष्ट्रीय मानसिक रोग निवारण कार्यक्रम के जिला समन्वयक डॉ. शिशुपालसिंह ने कहा कि बीमारियां दो तरह की होती है। एक शारीरिक और दूसरी मानसिक। शारीरिक बीमारी में सर्दी, जुखाम, बुखार, जकडऩ, वायरल आदि है, जबकि मानसिक बीमार में व्यक्ति का मन अस्थिर रहता है। जो ऊटपटांग हरकत करता है, मगर उस पर कोई जादू-टोना, टोटका नहीं हुआ है, बल्कि वह बीमारी से ग्रसित हुआ है। मानसिक बीमार के प्रति संवेदना रखें और उसे तत्काल मनो चिकित्सक को बताए, ताकि उसका त्वरित इलाज हो सके।

वे राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय देगवढ़ में आयोजित मानसिक रोग एवं अंधविश्वास जागरुकता कार्यशला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मन की बीमारी होते ही अशिक्षित तो क्या पढ़े-लिखे लोग भी भूत-प्रेत व टोने-टोटके के चक्कर में फंस कर भोपा और तांत्रिक से झाड़ फूंक करवा रहे हैं। यह बड़ी चिंता का विषय है कि लोग मानसिक विक्षिप्तता को टोना टोटका क्यों मान हे हैं। यह एक बीमारी मात्र है, जिसका मनो चिकित्सक से उपचार संभव है। इसके लिए राजसमंद में आरके जिला चिकित्सालय में यह सुविधा है, जबकि उदयपुर, जोधपुर, जयपुर में अलग अस्पताल है। इसलिए किसी को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। छात्र छात्राएं अपने आस पास के गली, मोहल्ले में अगर कोई मानसिक बीमार दिखें, तो उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के लिए पे्ररित व प्रोत्साहित करें।

दो तरह की मानसिक बीमारियां
उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारी भी मुख्य रूप से दो तरह की है, जिसमें एक स्कींजोफे्रनिया व दूसरी अवसाद है। स्कींजोफे्रनिया में एक मानसिक असंतुलन है, तो व्यक्ति की जिंदगी के सभी पहलुओं को यहां तक की व्यक्ति की सोच, अहसास व व्यवहार को भी प्रभावित करता है। इसके मुख्य लक्षण शक करना, बहकावट, दृष्टिभ्रम, लडख़ड़ाहट भरी बोली, असामान्य व्यवहार व उत्तेजना, बात न करना, संवेदना की कमी, धीमी चाल, उन्माद आदि है। इसके अलावा बिना किसी कारा से अथवा कारणों से डर या दु:खी होना अथवा खिन्नता से मानसिक विकृति आना ही अवसाद है। इसके लक्षण उदास रहना, वजन कम होना, नींद न आना, थकावट, खुद के प्रति घृणा, निर्णय में असमर्थता, आत्महत्या के विचा आना आदि है।

देवगढ़ में 16 मानसिक विक्षिप्तों का इलाज
राजसमंद. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से देवगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में मंगलवार को आयोजित विशेष शिविर में 16 मानसिक विक्षिप्तों का इलाज किया गया। परिजनों से परामर्श के बाद विक्षिप्तों के लिए नि:शुल्क दवाइयां भी वितरित की गई। लगातार पत्रिका की खबरों के बाद अब मानसिक विक्षिप्त लोग झाड़-फूंक व भोपे की बजाय चिकित्सक से इलाज के लिए पहुंचने लगे हैं। राजस्थान पत्रिका के अंधविश्वास का मायाजाल अभियान के तहत 13 अगस्त को ‘अंधविश्वास बना रहा पढ़े-लिखों को पागल...’, 14 अगस्त को ‘दर दर भटकते गुजरी जिन्दगी, फिर मौत भी लावारिस...’ शीर्षक से खबरें प्रकाशित कर विक्षिप्तों की स्थिति व अंधविश्वास को लेकर हालात सामने आए गए। इस पर चिकित्सा विभाग द्वारा राष्ट्रीय मानसिक रोग निवारण कार्यक्रम के तहत देवगढ़ में मंगलवार को विशेष चिकित्सा शिविर सुबह 9 बजे शुरू हुआ। शिविर में मनो चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. शिशुपाल सिंह द्वारा विक्षिप्त व उनके परिजनों से बीमारी के संबंध में जानकारी ली। साथ ही उसके इलाज के लिए परामर्श देते हुए दवाइयां वितरित की। सायकेट्रिक नर्स रामबाबुसिंह द्वारा चिकित्सक डॉ. सिंह के निर्देशानुसार उपचार किया।

आमेट में चिकित्सा शिविर 11 को
मानसिक रोग निवारण शिविर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आमेट में 11 सितम्बर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेलमगरा में 18 सितम्बर और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चारभुजा में 25 सितम्बर को लगेगा। डॉ. शिशुपालसिंह ने शिविर में अधिकाधिक लोगों को शामिल होने का आह्वान किया है।

Published on:
05 Sept 2018 11:08 am