राजसमंद

खौफ के साये में पढ़ने को मजबूर मासूम, जर्जर भवनों में टपक रहा पानी

खौफ के साये में पढ़ने को मजबूर मासूम, जर्जर भवनों में टपक रहा पानी

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Jun 28, 2018

राजसंद।बारिश के शुरू होते ही शिक्षा महकमे की पोल खुलना शुरू हो गई है। जिम्मेदारों की लापरवाही से सरकारी स्कूलों में खौफ के साये में बच्चे पढ़ने को मजबूर है। लेकिन अधिकारी बेपरवाह होकर बैठे हैं। मामला राजसंद जिले का है, जहां 200 से अधिक विद्यालयों के भवन जर्जर हालात में हैं। इससे बारिश के दिनों में ऐसे भवनों में पानी टपकना शुरू हो जाता है। भवनों को जर्जर हालात में देख मासूमों के परिजनों की भी चिंताएं बढ़ गई है। लेकिन अब तक इनकी मरम्मत होने की बजाए, विभाग सिर्फ प्रस्ताव ही भेज पाया है, जबकि बारिश शुरू हो चुकी है। अब बारिश से पूर्व ऐसे जर्जर भवनों की मरम्मत करा पाना असंभव साबित हो रहा है। ऐसे में शिक्षा ग्रहण करने स्कूल आ रहे बच्चों और अध्यापन करवा रहे शिक्षकों में बारिश के साथ भवनों के जर्जर हालात का खौफ बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि इन स्कूलों में बारिश शुरू होते ही शिक्षा की पूरी गणित बिगड़ जाती है। बच्चों को सूखी जगह बिठाना स्कूल प्रशासन के लिए मुसीबतभरा हो रहा है। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई तो दूर की कौड़ी बन गई है।

200 स्कूलों के हालात खराब

सलूस रोड कांकरोली स्थित भीमराव अम्बेडकर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय और सूरजपोल स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के बरामदे व कमरों में पहली बारिश में ही पानी टपकने की समस्या शुरू हो गई है। इसके अलावा सलोदा के सरकारी विद्यालय का पूरा भवन बारिश में टपकता है। इससे बच्चों की पढ़ाई तक बाधित रहती है। यहां दो नए कमरे बन रहे हैं, लेकिन कमरों की बारिश के बाद ही पूर्ण रूप से बनने की उम्मीद है। स्कूल की प्रधानाध्यापिका का कहना है कि जर्जर भवनों और पानी टपकने की प्रशासन को शिकायत कर रखी है, अगर नए कमरे समय से पूरे हो जाएंगे तो बच्चों को जरूर राहत मिलेगी। इसके अलावा वागरेचा की भागल स्थित प्राथमिक विद्यालय में दो कमरे बने हुए हैं। दोनों में बरसात होते ही पानी टपकना शुरू हो जाता है। संस्था प्रधान किशनसिंह राजपूत ने बताया कि इसकी शिकायत पंचायत से लेकर उच्चाधिकारियों तक भेजी है, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

टपकते पानी के बीच पढ़ने को मजबूर मासूम

विभाग को पूर्व में ही इस बात का पता होता है कि कौनसे विद्यालय क्षतिग्रस्त है और किनकी मरम्मत करानी बाकी है। ऐसे में बारिश से पूर्व ही ग्रीष्मकालीन अवकाश में भवनों की देखभाल और मरम्मत का काम पूरा हो जाए तो बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं हो पाती। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से कक्षा-कक्षों व बरामदों में पानी टपकने से बच्चों की पढ़ाई पर खासा असर देखने को मिल रहा है। इसके चलते सभी कक्षाओं के बच्चों को एक जगह बिठाकर पढ़ाई करवाना मजबूरी हो गई है।

200 से अधिक स्कूलों में मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजे गए हैं। स्वीकृति होते ही स्कूलों को राशि आवंटित कर दी जाएगी। भानू वैष्णव, एडीपीसी, राजसमंद

Published on:
28 Jun 2018 08:13 pm
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