
पत्रिका फाइल फोटो
Piparda Panchayat Case: राजसमंद जिले में प्रशासनिक आदेशों में पहले तेजी और फिर अचानक ब्रेक लगने का मामला इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ताजा प्रकरण ग्राम पंचायत पीपरड़ा में प्रशासक नियुक्ति से जुड़ा है, जहां जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश को फिलहाल परीक्षण में रख लिया गया है। इससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
जानकारी के अनुसार जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा ने पूर्व में आदेश जारी कर गोविंद सिंह को नव-नियुक्त प्रशासक के रूप में पदभार सौंपने की घोषणा की थी। लेकिन ज्वाइनिंग से पहले ही आदेश पर रोक लगा दी गई और फाइल को पुनः विचाराधीन कर लिया गया।
वर्तमान में यह मामला कलक्टर स्तर पर लंबित है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी बृजमोहन बैरवा के अनुसार प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण विधिक राय ली जा रही है। कलक्टर ने भी स्पष्ट किया है कि आगे की कार्रवाई कानूनी परामर्श के आधार पर ही होगी।
इससे पहले जारी आदेश में ग्राम पंचायत पीपरड़ा की पूर्व सरपंच एवं वर्तमान प्रशासक सीता बाई को पदमुक्त किया गया था। यह कार्रवाई पंचायती राज विभाग, जयपुर के 8 अप्रेल के आदेश के तहत की गई थी। साथ ही जिला परिषद के निर्देशों के अनुरूप गोविंद सिंह (वर्तमान वार्ड पंच एवं प्रशासनिक समिति सदस्य) को नया प्रशासक नियुक्त किया गया था, जिन्हें आगामी चुनाव या अगले आदेश तक कार्यभार संभालना था। प्रशासक की नियुक्ति अटकने से पंचायत में प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होना तय है। हालांकि जिला कलक्टर ने मामले में विधिक परामर्श के आधार पर निर्णय लेने की बात कही है।
गौरतलब है कि पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर के राजसमंद दौरे के दौरान पीपरड़ा में सफाई व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई गई थी। मंत्री के निर्देश पर प्रशासक को पदमुक्त किया गया, जिसे प्रशासक ने न्यायालय में चुनौती दी और उन्हें स्थगन आदेश प्राप्त हो गया। अब कलक्टर द्वारा गोविंद सिंह के मनोनयन की फाइल विधिक राय के लिए मंगाई गई है, जिससे फिलहाल पूरे मामले का निस्तारण लंबित है। ग्राम पंचायत प्रशासक का पद रिक्त होने से प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
Published on:
04 May 2026 10:41 am
