राजसमंद

Rajsamand: नाथद्वारा का 140 साल पुराना ‘सुन्दर विलास कुंड’ बनेगा टूरिस्ट डेस्टिनेशन, 147.60 लाख का बजट मंजूर

Rajasthan Heritage Conservation: राजसमंद जिले के नाथद्वारा स्थित ऐतिहासिक सुन्दर विलास कुंड के संरक्षण और पुनर्स्थापन का रास्ता अब साफ हो गया है।

2 min read
सुंदर विलास कुंड नाथद्वारा, पत्रिका फोटो

Rajasthan Heritage Conservation: राजसमंद जिले के नाथद्वारा स्थित ऐतिहासिक सुन्दर विलास कुंड के संरक्षण और पुनर्स्थापन का रास्ता अब साफ हो गया है। राज्य के 2024-25 की बजट घोषणा के तहत इस परियोजना को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

इसके तहत कुल 147.60 लाख रुपए की स्वीकृत लागत में से वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए 73.80 लाख रुपए की प्रथम किस्त जारी करने का निर्णय लिया गया है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, जयपुर को इस कार्य की क्रियान्वयन एजेंसी बनाया गया है, जो राजस्थान पर्यटन अवसंरचना संरक्षण कोष के माध्यम से राशि प्राप्त कर परियोजना को अमल में लाएगा। योजना के तहत कुंड के संरक्षण के साथ-साथ आधारभूत सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा।

ये भी पढ़ें

Rajsamand: CBSE की 10वीं सेकेंड बोर्ड परीक्षा में खेल! परीक्षा के नाम पर निजी स्कूल मांग रहे 3 महीने की फीस

ये होंगे प्रमुख काम

  • 100 लाख रुपए की लागत से संरक्षण एवं पुनर्स्थापन कार्य
  • 30 लाख रुपए में दो टॉयलेट ब्लॉक
  • 2 लाख रुपए में जल आपूर्ति व्यवस्था
  • 2 लाख रुपए में आंतरिक विद्युत कार्य
  • 10 लाख रुपए में सिल्ट हटाने व डीवॉटरिंग कार्य
  • 2.5 प्रतिशत कंटीजेंसी और अन्य मदों पर 3.60 लाख रुपए का प्रावधान

कार्य प्रारंभ से पहले होगी फोटोग्राफी

कार्य प्रारंभ करने से पहले और पूर्ण होने के बाद सुन्दर विलास कुंड स्थल की स्पष्ट फोटोग्राफी कर दस्तावेजीकरण किया जाएगा। साथ ही कार्य प्रगति की रिपोर्ट समय-समय पर संबंधित विभाग को भेजी जाएगी। इस स्वीकृति के बाद क्षेत्र के ऐतिहासिक धरोहर सुन्दर विलास कुंड के संरक्षण को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे नाथद्वारा के पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व में भी वृद्धि होगी।

140 वर्ष पुराना है ये ऐतिहासिक कुंड

करीब 140 वर्ष पूर्व निर्मित यह कुंड वर्षों से क्षेत्र की आस्था का केंद्र रहा है, जहां संत निवास के साथ विभिन्न धार्मिक आयोजनों की परंपरा जुड़ी रही है। कुंड की विशेषता यह है कि इसमें स्थित कुआं और नाथूवास तालाब से जलस्तर का रिचार्ज होता है, वहीं बरसाती नालों का पानी भी इसमें आकर मिलता है। इस कारण यह जल संरक्षण की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है।

हालांकि वर्तमान में सीवरेज का गंदा पानी कुंड में पहुंचने से हालात चिंताजनक हो गए हैं। गंदगी के बढ़ते स्तर और नियमित साफ-सफाई के अभाव में कुंड का मूल स्वरूप लगातार बिगड़ता जा रहा है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक गरिमा प्रभावित हो रही है।

ये भी पढ़ें

Rajasthan: डिजिटल डकैती का ‘दुबई’ कनेक्शन, 400 फर्जी सिग्नेचर से सिस्टम हैक, सिर्फ 1 लॉगिन से 400 करोड़ ठगे

Also Read
View All