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नारायणलाल गुर्जर जब भी गांव आते थे, सुबह चार बजे उठाकर युवाओं को लगवाते थे दौड़

- राष्ट्रीय दिवस पर स्कूल में सुनाते थे भगत, सुभाष की कविताएं
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नारायणलाल गुर्जर जब भी गांव आते थे, सुबह चार बजे उठाकर युवाओं को लगवाते थे दौड़

जितेन्द्र पालीवाल @ राजसमंद

नारायणलाल गुर्जर...। उन्हें गांव के बच्चे प्यार से 'काकाÓ पुकारते थे। जब भी वह गांव आते थे, युवाओं से घिर जाते थे। चर्चाओं का दौर शुरू होता था, तो थमता न था। वह एक बात हमेशा कहते थे। जिन्दगी छोटी भले हो, मगर अच्छी होनी चाहिए। 38 साल की नारायण की छोटी सी जिन्दगी वाकई में इतिहास में दर्ज हो गई। अब शहीद हैं। मां-बाप के बगैर बचपन से संघर्ष में बढ़े हुए नारायणलाल की युवाओं को दी इस सीख को आज हर शख्स बताते हुए थक नहीं रहा। बिनोल गांव और इस इलाके में उनकी प्रेरणा ने देश सेवा के जज्बे को और मजबूत बनाया है। गांव के भैरूलाल सेन ने बताया कि नारायणलाल छुट्टियों में जब भी गांव आते थे, तो सबसे पहले परिवारजनों से मिलकर घर से बाहर निकल जाते थे। युवाओं से उनका खासा लगाव था। मित्रों को फोन करके बुलाते थे। एक जगह एकत्र होने पर कसरत, स्वास्थ्य, शिक्षा, देशभक्ति और देशसेवा के ईर्द-गिर्द अपनी चर्चा को बांध लेते थे। सुरक्षा बलों में जाने के लिए हरदम अपने को तैयार रखने के लिए वह हमेशा प्रेरित करते थे। विकास दवे बताते हैं कि युवाओं को जल्दी उठने व फौजी की तरह जिन्दगी जीने को कहा करते थे। नारायण कहते थे, देश का आमजन जब सशक्त होगा, तो राष्ट्र खुद ही ताकतवर बन जाएगा।

स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर करते थे कविता पाठ
नारायणलाल को राष्ट्रीय पर्व पर अपने गांव के स्कूल में कविता सुनाने का बड़ा शौक था। उनकी देशभक्ति से ओतप्रोत जोशभरी कविताएं सुनकर लोग भावुक हो उठते थे। उनकी पंक्तियां आज भी लोगों के दिलो-दिमाग में ताजा हैं। देश को नेताजी चाहिए तो सुभाष जैसा.... नेताजी चाहिए तो भगत सिंह जैसा..... नेताजी चाहिए तो चन्द्रशेखर आजाद जैसा... कविता उनकी दिल के काफी करीब थी, जो उन्होंने खुद लिखी थी।

खो गया युवाओं की आंख का तारा
नारायणलाल अब नहीं है, युवाओं को यह विश्वास नहीं हो रहा। पवन दाधीच ने बताया कि नारायणलाल उनका परम मित्र था। वह बहुत ही नेकदिल इन्सान था। विनोद सेन ने कहा कि वह सदैव करीब व जरूरतमंद लोगों की मदद को तैयार रहते थे। अशोक दाधीच ने बताया कि नारायण से उनका करीबी रिश्ता था। वह खुशमिजाज तथा हंसमुख स्वभाव का था। वह कभी विपत्तियों से घबराने वाला इंसान नहीं था। नारायण की कमी उनके जीवन को खलेगी। शैतान सिंह ने बताया कि युवाओं को सेना में भर्ती होने, सुबह व्यायाम, कसरत करने व एकाग्रचित्त होकर अध्ययन के लिए प्रेरित करते थे।

Published on:
16 Feb 2019 09:00 am