- ओवरफ्लो के 24 घंटे होने से पहले ही खोली नहरें
नाथद्वारा. शहर के लिए पेयजल की मुख्य लाइफलाइन नन्दसमंद बांध के छलकने के बाद मंगलवार को बांध पर 6 इंच की चादर चलने लगी। उधर बांध के छलकने के बाद 24 घंटे में भी बनास नदी में पानी नहीं गया और प्रशासन द्वारा खारी व भराई नहर को खोल दिया गया। जानकारी के अनुसार सोमवार रात ठीक दस बजे बांध के छलकने के बाद बांध पर मंगलवार को छह इंच की चादर चलने लगी, जिसे देखने कई लोग मौके पर पहुंचे। वहां का नजारा मनमोहक था। लोग अपने मोबाइल से फोटो लेने में लगे रहे।
बाघेरी के छलकते ही शुरू हो गई थी आवक
32 फीट की कुल भराव क्षमता वाले इस बांध में बाघेरी बांध के २४ अगस्त को छलकने के बाद से ही पानी की आवक प्रारंभ हो गई। इससे बांध का जलस्तर तेजी से बढऩे लगा। मात्र एक सप्ताह में ही बांध छलक पड़ा।
देर से पहुंची पुलिस
बांध के छलकने के बाद प्रशासन द्वारा कोरोना संक्रमण एवं सुरक्षा की दृष्टि से सुरक्षा व्यवस्था के लिये पुलिसकर्मी को तैनात किया, जो लगभग साढ़े ९ बजे के आसपास पहुंचा। इससे पहले कई लोग बांध पर पहुंच गए एवं काले किवांड के चैनल के वहां पर ताला लगे होने के बाद भी ऊपर चढ़कर आ-जा आ रहे थे।
खारी फीडर 5 फीट व भराई 3 फीट
बांध के छलकने के बाद 24 घंटे भी बनास नदी में पूरा पानी नहीं चला और उसके बाद मंगलवार को प्रात: ६ बजे ही खारी फीडर को खोल दिया गया, जिससे राजसमंद में पानी पहुंचना पूरे वेग से प्रारंभ हो गया। राजसमंद झील में शाम पांच बजे मोरचना के पास होते हुए पानी पहुंच गया। वहीं यहां से निकल रही दाई भराई फीडर से भी पानी खोल दिया गया, जिससे इससे ३ फीट चल रह रहा है जो भी सायंकाल ५ बजे तक नहर की सीमा को ७५ प्रतिशत पार कर गया था।
शाम पांच बजे पहुंचा राजसमंद झील में पानी
राजसमंद. नन्दसमंद बांध के सोमवार रात 10 बजे छलकने के बाद मंगलवार शाम पांच बजे खारी फीडर से होता हुआ पानी राजसमंद झील में जा मिला। फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि दस से पन्द्रह दिन ये पानी ऐसे ही चलेगा। यदि नन्दसमंद बांध के जलग्रहण क्षेत्र में और बारिश होती है तो ये पानी बाद में और चल सकता है।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ओंकार बेरवाल ने बताया कि फिलहाल प्रतिदिन 15 एमसीएफटी पानी झील में आएगा। झील का एक फीट जलस्तर बढऩे में करीब 100 एमसीएफटी पानी की जरूरत होती है। नया पानी पहुंचने से पहले सोमवार सवेरे तक झील का जल स्तर 6.2 फीट था। उल्लेखनीय है कि 30 फीट की क्षमता वाली राजसमंद झील का फैलाव 16 वर्ग किमी से ज्यादा है।
खत्म हुआ इंतजार
पूरा सावन मास खाली जाने के बाद भादो मास में मेघ मेहरबान रहे। हालांकि ऐसा माना जाता है कि मेवाड़ में भादों में ही ज्यादा बारिश होती रही है। अभी ऐसी संभावना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में और बारिश होगी, जिससे जलग्रहण क्षेत्रों के जरिए बांधों में पानी की अच्छी आवक होगी और इस बार झील में अच्छा पानी आ सकता है।