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पत्रिका विशेष… कारगिल युद्ध में पैर गंवाने वाला ये जांबाज योद्धा, आज इस वजह से बहा रहा है आंसू

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Jul 18, 2018
करगिल युद्ध
करगिल युद्ध

राजसमंद/भीम.

करगिल युद्ध की 19वीं बरसी पर देश अपने सबसे बड़े दुश्मन पाकिस्तान से मई, 1999 में शुरू हुई और करीब तीन महीने तक चली जंग को याद कर हमारे जांबाज सैनिकों-शहीदों की शहादत को नमन कर रहा है। अफसोस कि करगिल युद्ध में अदम्य साहस दिखाने वाले मगरा क्षेत्र (भीम-देवगढ़) के मियाला खेत (थानेटा) के राइफलमैन दुर्ग सिंह दुर्ग सिंह को सरकारी वादों ने लगातार छला।

दायां पैर घुटने के नीचे से उड़ गया
करगिल में रात-दिन लड़ते हजारों भारतीय सैनिकों में शामिल सरहद के रखवाले ने गोली-तोपों, पत्थरों की बरसात का सामना किया, तो कभी जान हथेली पर ले साथी योद्धाओं को मदद की थी। जंग में उतरने के बाद लड़ाके ने अपने जज्बे को बयां करते हुए दुर्ग सिंह ने बताया कि जंग में हालात प्रतिकूल थे। मौसम व कठिन हालातों में जंग लड़ी। उनकी बटालियन द्रास सेक्टर में टोलोलिंक पोस्ट पर ड्यूटी थी। 13 जून, 1999 की रात में एलओसी पर फायरिंग के दौरान विस्फोट में उनका दायां पैर घुटने के नीचे से उड़ गया। बाएं पैर में गोलियां लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्गसिंह ने बताया कि उस वक्त मेजर विवेक गुप्ता सहित उनके 9 साथी शहीद हो चुके थे। वह घटनास्थल पर बेहोश हो गए। घायलावस्था में 15-16 घण्टे बाद रेंगते हुए अन्य पोस्ट तक पहुंचे। साथियों ने श्रीनगर स्थित आर्मी चिकित्सालय में भर्ती कराया। दिल्ली के बेस अस्पताल में शिफ्ट कर उनका ऑपरेशन किया।

सीमा पर दुश्मनों से लड़े, अब बीमारी से...

आर्मी से सेवानिवृत्ति पर राज्य सरकार ने भीम तहसील में कनिष्ठ लिपिक पद पर नौकरी दी। अगस्त, 2008 में एक हमले में गंभीर चोट पहुंचने से मस्तिष्क सम्बंधी रोग के कारण याददाश्त व आंखों की रोशनी पर असर पड़ा, तो नौकरी से त्याग-पत्र देना पड़ा। इलाज में अभी तक 8-10 लाख खर्च होने के बावजूद सुधार नहीं हुआ है। सेहत दिनों-दिन गिरती जा रही है। गम्भीर चोट और लीवर डैमेज होने व अल्सर के चलते वह कई दिनों से खाना नहीं खा पा रहे हैं। दिमागी बीमारी के चलते आंखों से दिखने में परेशानी है। वर्षों से लगातार दवाइयों के सहारे है और बेबसी के चलते आज आंसू बहा रहा है।


राजे और शेखावत का वादा रहा अधूरा

दुर्ग सिंह ने बताया कि उन्होंने भारतीय थल सेना में राइफलमैन के पद भर्ती होकर 11 वर्ष तक रक्षा सेवा की। पूर्व राष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत व भाजपा नेता वसुन्धरा राजे ने दुर्ग सिंह को घायल होने के बाद पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। दुर्ग सिंह का आरोप है कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने उन पर हुए हमले के आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई में भी संजीदगी नहीं दिखाई। राज्य सेवा में दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूर्ण नहीं कर पाने का बहाना कर उन्हें किसी भी तरह का सेवालाभ नहीं दिया जा रहा, न ही उनके आश्रित को राजकीय सेवा में नियुक्ति मिल पा रही है।

पूर्व सैनिक की सुध लेने वाला कोई नहीं
उदयपुर संभाग से एकमात्र करगिल विजय वीर की पुत्री सुशीला को राजकीय सेवा में नियुक्ति व जिला कलक्टर द्वारा घोषित पांच बीघा भूमि व आवासीय भूखण्ड का पट्टा अब तक नहीं मिला है। सुविधाओं के नाम पर उन्हें करिगल विजयवीर भारत गैस वितरक का लाइसेंस मिला। वर्तमान में वह भीम में अपनी वृद्ध माता व पत्नी और तीन पुत्रों के साथ रह रहे हैं। वीर दुर्ग सिंह की हालत दयनीय है। वर्षों से गंभीर रूप से बीमार चल रहे पूर्व सैनिक की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

Published on:
18 Jul 2018 04:08 am