राजसमंद

मोरबी में फल फूल रहा वॉल टाइल उद्योग, यहां भी लगे इण्डस्ट्री

गुजरात के मोरबी शहर में बीते दो दशकों से बढ़ते सेरेमिक और वॉल टाइल उद्योग के कारण न केवल राजसमंद से कच्चा माल निर्यात हो रहा है, बल्कि यहां बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ती जा रही है

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राजसमंद. गुजरात के मोरबी शहर में बीते दो दशकों से बढ़ते सेरेमिक और वॉल टाइल उद्योग के कारण न केवल राजसमंद से कच्चा माल निर्यात हो रहा है, बल्कि यहां बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ती जा रही है। यहां से हर दिन ट्रोलों से खनन अपशिष्ट और खनिज सामग्री मोरबी भेजी जा रही है, जिनकी बदौलत वहां यह उद्योग पंख फैलाने में सफल हो पाया है। ऐसे में हमारे संसाधन और मेहनत होने के बावजूद यहां के श्रमिकों का हक मारा जा रहा है।

हमारी ताकत: कच्चा माल और श्रमिक हमारे, लेकिन किसकी मेहनत?

मोरबी में लगभग हजारों सेरेमिक टाइल, वॉल टाइल बनाने वाली इंडस्ट्रीज स्थापित हो चुकी हैं। इन उद्योगों में इस्तेमाल होने वाला करीब 80 प्रतिशत कच्चा माल यहां से जा रहा है। मार्बल स्लरी और ग्रेनाइट स्लरी से निकला वेस्ट वॉल टाइल बनाने में उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में यह एक गंभीर संकेत है कि हमारी मेहनत और संसाधन से दूसरे राज्य की औद्योगिक प्रगति लगातार हो रही है। जबकि यहां के बेरोजगार रो•ागार के लिए पलायन करने को मजबूर हैं।

… तो राइजिंग राजस्थान का सपना होगा साकार

यहां कच्चे माल की उपलब्धता और मानव श्रम बहुतायत में है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार यदि इस उद्योग को प्रोत्साहित करती है, तो यह न केवल स्थानीय बेरोजगारी की समस्या को दूर करेगा, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति में भी सुधार ला सकता है। साथ ही, यह ’राइजिंग राजस्थान’ के लक्ष्य को हासिल करने में भी सहायक हो सकता है।

स्थानीय समाधान और सरकारी कदम

अगर राज्य सरकार इस परिस्थिति पर गौर करे और मार्बल उत्पादन के रूप में पहचान बनाने वाले राजसमंद जैसे क्षेत्रों में इस उद्योग को स्थापित किया जाए तो बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही राजसमंद सहित आस-पास के क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। यहां उद्योग लगने से राजसमंद व उसके आस-पास डंङ्क्षपग यार्ड में जमा मार्बल स्लरी का उपयोग सेरेमिक टाइल बनाने में किया जा सकेगा। इस स्लरी का व्यावसायिक उपयोग न केवल राजसमंद बल्कि राजस्थान के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है।

मार्बल स्लरी के लिए बने एमएसएमई

सरकार के पास समय है कि राजसमंद जैसे शहर में प्रचुर मात्रा में मार्बल का उत्पादन होता है। लेकिन सही तरीके से ध्यान नहीं दिए जाने और कई प्रकार की कानूनी पेचीदगियों के कारण ये उदयोग अब धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। डंप स्लरी का स्थानीय उद्योगों में टाइल्स निर्माण में उपयोग किया जाए। इसके लिए ऐसी यूनिटें लगाने की छूट प्रदान की जाए। ऐसी यूनिट लगने से यहां की डंप स्लरी का उपयोग टाइल्स निर्माण में किय जा सकेगा। मार्बल स्लरी के उपयोग को लेकर सरकार को एमएसएमइ की स्थापना करनी चाहिए ताकि युवा उद्यमियों को नए अवसर मिल सके।

समय की पुकार: सरकार के सक्रिय कदमों की आवश्यकता

क्षेत्र के बेरोजगारों के लिए यह चेतावनी का समय है। अगर सरकार अब भी इस अवसर का लाभ उठाने के लिए सक्रिय कदम नहीं उठाती, तो पलायन की समस्या और गंभीर हो सकती है। हमारे पास सभी आवश्यक संसाधन हैं - कच्चा माल, श्रमिक और प्राकृतिक संसाधन हैं। जरूरत इस बात की है कि इनका सही उपयोग किस तरह से किया जाए। यदि सरकार के स्तर पर इण्डस्ट्रीज स्थापित की जाती है तो यहां पर चल रहे मार्बल उद्योग के विकास को नए पंख लगेंगे और तेजी के साथ काम हो सकेगा।

सरकार इस पर दे ध्यान…

राज्य सकार को राजसमंद के मार्बल उद्योग पर ध्यान देना चाहिए। यहां पर सिरेमिक का प्लांट लगाकर स्लरी का उपयोग किया जा सकता है। ये काम गैस प्लांट लगाने से ही संभव हो पाएगा। क्योंकि गैस प्लांट लगने से उपयुक्त तापमान मिल सकेगा और वेस्ट का सही इस्तेमाल यहां पर हो पाएगा। इसके अलावा सरकार की ओर से जो 18 प्रतिशत की जीएसटी लगा रखी है। उसको कम किया जाना चाहिए ताकि मार्बल व माईङ्क्षनग उद्योग तेजी से विकसित हो सके। यहां से स्लरी बेहद सस्ते दामों पर मोरबी जा रही है। यदि सरकार चाहे तो इसको रोककर यहीं पर इसका उत्पादन किया जा सकता है।
-नानालाल, अध्यक्ष, मिनरल-माईंस एसोसिएशन, केलवा

Published on:
25 Jan 2025 02:24 pm
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