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सड़कों पर पसरी बजरी बन रही हादसों की वजह, वाहन चालक भुगत रहे खामियाजा

राजसमंद. रेलमगरा क्षेत्र में बनास नदी से बजरी के खनन पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद बजरी माफिया बेखौफ होकर अवैध खनन और परिवहन को अंजाम दे रहा है। चोरी-छिपे बजरी का परिवहन करते समय पकड़े जाने के डर से वाहन चालक अक्सर बीच सड़क पर ही बजरी खाली कर फरार हो जाते हैं। नतीजतन […]

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Illigal Mining News

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राजसमंद. रेलमगरा क्षेत्र में बनास नदी से बजरी के खनन पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद बजरी माफिया बेखौफ होकर अवैध खनन और परिवहन को अंजाम दे रहा है। चोरी-छिपे बजरी का परिवहन करते समय पकड़े जाने के डर से वाहन चालक अक्सर बीच सड़क पर ही बजरी खाली कर फरार हो जाते हैं। नतीजतन सड़क पर फैली बजरी आम वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी और खतरे का कारण बनती जा रही है।

रात के अंधेरे में बजरी माफिया बनास नदी में ट्रैक्टर उतारकर अवैध खनन कराता है और बजरी से लदे वाहनों को आबादी क्षेत्रों से होकर दौड़ाया जाता है। स्थानीय लोग जब इन वाहनों को आबादी क्षेत्र से नहीं ले जाने की बात कहते हैं, तो माफिया उनसे उलझने और विवाद करने पर उतर आता है। पुलिस का खौफ भी इन पर असर करता नजर नहीं आ रहा। उपखंड के जगपुरा और गिलूण्ड क्षेत्र में इन दिनों माफिया की दादागिरी खुलकर सामने आ रही है।

दिन ढलते ही बजरी माफिया के वाहन बनास नदी की ओर रुख कर लेते हैं। जैसे-जैसे रात गहराती है, ट्रैक्टरों को नदी में उतार दिया जाता है। माफिया के लोग दोपहिया वाहनों पर सवार होकर नदी की ओर जाने वाले रास्तों पर रेकी करते रहते हैं और हर गतिविधि की जानकारी ट्रैक्टर चालकों तक पहुंचाते हैं। खतरा न होने की सूचना मिलते ही ट्रैक्टर चालक तेज रफ्तार से बजरी भरकर बाहर निकलता है, जबकि मौके पर मौजूद श्रमिक दूसरे ट्रैक्टर में बजरी भरने में जुट जाते हैं। यह सिलसिला पूरी रात चलता रहता है।

इस अवैध गतिविधि का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। कई बार माफिया और स्थानीय लोगों के बीच झड़प की स्थिति बन जाती है। विरोध करने पर जान से मारने की धमकियां तक दी जाती हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि बजरी परिवहन में लापरवाही के चलते कई बार दोपहिया और चारपहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।

जब रेकी कर रहे लोग किसी अप्रत्याशित खतरे की सूचना देते हैं, तो चालक चलते ट्रैक्टर की ट्रॉली को लिफ्ट से ऊपर कर सड़क पर ही बजरी खाली कर देता है और मौके से फरार हो जाता है। अगले ही दिन यही माफिया फिर उसी सड़क से बजरी भरकर ले जाता है। सड़क पर बिखरी बजरी से अन्य वाहन चालकों को आवागमन में भारी दिक्कत होती है और दुपहिया वाहनों के फिसलने का हमेशा खतरा बना रहता है।

सुरक्षा गार्डों की तैनाती पर सवाल

बनास नदी से अवैध बजरी खनन रोकने के लिए क्षेत्र में कई स्थानों पर सुरक्षा गार्डों की तैनाती की गई है, लेकिन इसके बावजूद खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था और तैनात गार्डों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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