Farmers exploitation: राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ द्वारा हाल ही में लोकार्पित रेलमगरा कृषि गोण मंडी अब भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विवादों में घिर गई है। किसानों ने मंडी प्रशासन और ठेकेदार की मिलीभगत से अतिरिक्त गेहूं और मनमानी मजदूरी वसूली का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
Farmers exploitation: राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ द्वारा हाल ही में लोकार्पित रेलमगरा कृषि गोण मंडी अब भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विवादों में घिर गई है। किसानों ने मंडी प्रशासन और ठेकेदार की मिलीभगत से अतिरिक्त गेहूं और मनमानी मजदूरी वसूली का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। मामला बढ़ने पर तहसील प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद किसानों को अतिरिक्त लिया गया गेहूं और वसूली गई राशि वापस लौटाई गई।
किसानों का आरोप है कि प्रति 50 किलो गेहूं के कट्टे पर बारदाना का वास्तविक वजन जहां केवल 135 ग्राम निर्धारित है, वहीं किसानों से 400 से 600 ग्राम तक अतिरिक्त गेहूं लिया जा रहा था। इससे किसानों को प्रति क्विंटल करीब 20 रुपए तक का नुकसान झेलना पड़ रहा था। इतना ही नहीं, नियमानुसार 12 रुपए प्रति कट्टा तय मजदूरी के स्थान पर 20 से 30 रुपए तक वसूले जा रहे थे, जिससे किसानों पर प्रति क्विंटल 30 से 40 रुपए तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा था।
रेलमगरा निवासी किसान भरत जाट ने बताया कि ऑनलाइन पंजीयन के बाद जब वे गेहूं लेकर मंडी पहुंचे तो उनसे प्रति बैग 600 ग्राम अतिरिक्त गेहूं और 30 रुपए मजदूरी मांगी गई। विरोध करने पर उन्होंने मामले की शिकायत तहसीलदार से की। इसके बाद तहसील प्रतिनिधि एवं भू-अभिलेख अधिकारी बंशीलाल तेली मौके पर पहुंचे और कट्टों का दोबारा नियमानुसार तोल करवाया।
सकरावास निवासी किसान सीताराम ने भी आरोप लगाया कि उनसे अतिरिक्त गेहूं और मजदूरी राशि ली गई थी, लेकिन विरोध के बाद दोबारा तोल में करीब 7 किलो गेहूं वापस लौटाया गया और अतिरिक्त वसूले गए लगभग 200 रुपए भी वापस किए गए। मौके पर मौजूद क्वालिटी इंस्पेक्टर गणेशराज कुमावत ने माना कि किसानों से अतिरिक्त गेहूं और मजदूरी वसूली की जानकारी उन्हें किसानों के जरिए मिली। इसके बाद ठेकेदार को सख्त निर्देश दिए गए कि तय नियमों से अधिक गेहूं और मजदूरी नहीं ली जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रति बैग केवल 135 ग्राम बारदान वजन और 12 रुपए मजदूरी ही नियमानुसार तय है।
वहीं ठेकेदार के मुनीम ने स्वीकार किया कि अतिरिक्त गेहूं और मजदूरी लेने के निर्देश ठेकेदार की ओर से दिए गए थे। हालांकि बाद में मौके पर पहुंचे ठेकेदार उदयलाल अहीर ने ऐसे किसी भी निर्देश से इनकार करते हुए खुद को मामले से अलग बताया। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रशासनिक जांच में मौके पर ही गड़बड़ियां उजागर हो गईं, तो अब तक किसानों से अतिरिक्त रूप से वसूले गए गेहूं और मजदूरी की भरपाई कैसे होगी। साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती के दावे करने वाली सरकार के बीच आखिर मंडी में यह खेल किसकी सरपरस्ती में चल रहा था, इसे लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
रेलमगरा कृषि गोण मंडी में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद शुरू तो कर दी गई है, लेकिन किसानों के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव भारी परेशानी का कारण बन गया है। गेहूं बेचने पहुंचे किसान तपती गर्मी में घंटों अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि गोण मंडी आबादी क्षेत्र से काफी दूर स्थित है।
ऐसे में वे अपनी उपज और सामान को छोड़कर कहीं जा भी नहीं सकते। मजबूरी में किसानों को खुले आसमान के नीचे धूप में बैठकर इंतजार करना पड़ रहा है। मंडी परिसर में ना तो पर्याप्त छाया की व्यवस्था है और ना ही बैठने के लिए उचित इंतजाम। भीषण गर्मी के बीच किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे मंडी की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।