एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चला रही है और विद्यालयों को हरियाली बढ़ाने का केंद्र बना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर संसाधनों की कमी इन प्रयासों को प्रभावित करती नजर आ रही है।
मधुसूदन शर्मा
राजसमंद. एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चला रही है और विद्यालयों को हरियाली बढ़ाने का केंद्र बना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर संसाधनों की कमी इन प्रयासों को प्रभावित करती नजर आ रही है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बावजूद जिले के सरकारी विद्यालयों को यूथ एंड इको क्लब ग्रांट की राशि अब तक प्राप्त नहीं हो सकी है, जिसके चलते स्कूलों में पौधारोपण और अन्य पर्यावरणीय गतिविधियां ठप पड़ गई हैं।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्षों में शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों को नियमित रूप से इको क्लब ग्रांट उपलब्ध कराई जाती थी, जिससे विभिन्न पर्यावरणीय कार्यक्रम संचालित किए जाते थे। इस वर्ष ग्रांट जारी नहीं होने के कारण संस्था प्रधान और शिक्षक असमंजस की स्थिति में हैं। एक तरफ उच्चाधिकारियों द्वारा हरियाली अभियान के तहत पौधारोपण के सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आवश्यक संसाधनों का अभाव शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों को 5 हजार रुपए, उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10 हजार रुपए तथा माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 15 हजार रुपए तक की यूथ एंड इको क्लब ग्रांट दी जाती रही है। इस राशि का उपयोग पौधे खरीदने, ट्री-गार्ड लगाने, खाद की व्यवस्था करने तथा पर्यावरण जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने में किया जाता था। लेकिन इस बार बजट जारी नहीं होने से इन गतिविधियों का क्रियान्वयन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
विभागीय स्तर पर पौधारोपण के लक्ष्य तय किए गए हैं और उनकी नियमित मॉनिटरिंग के साथ फोटो अपलोड करने के निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद स्कूलों के पास पौधे खरीदने, उनकी सुरक्षा और देखभाल के लिए कोई बजट उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में कई शिक्षक अपनी व्यक्तिगत राशि खर्च कर या भामाशाहों के सहयोग से किसी तरह अभियान को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
ग्रांट जारी किए बिना अभियान को जारी रखने के निर्देशों ने शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही इस स्थिति को लेकर असमंजस और निराशा में हैं। पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर संसाधनों की कमी अभियान की प्रभावशीलता को प्रभावित कर रही है।
शिक्षक संघ रेसटा राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया कि समग्र शिक्षा अभियान कार्यालय की ओर से हर वर्ष स्कूलों को यूथ एवं इको क्लब ग्रांट का बजट जारी किया जाता है, लेकिन इस बार वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बावजूद राशि जारी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि बिना बजट के पौधारोपण जैसे कार्यक्रम पूरी तरह ठप हो गए हैं और हरियाली अभियान अधर में लटक गया है। उन्होंने मांग की कि जल्द से जल्द बजट जारी किया जाए, ताकि स्कूलों में पर्यावरणीय गतिविधियां पुनः सुचारू रूप से शुरू हो सकें।