जिला परिषद की बैठक में सत्तापक्ष के कुम्भलगढ़ विधायक ने किरण माहेश्वरी पर साधा निशानाकहा- मंत्री को खुश करने से ही चलेगी जिला परिषद?
राजसमंद. जिला परिषद की मंगलवार को हुई साधारण सभा की बैठक में सत्तापक्ष के कुम्भलगढ़ विधायक सुरेन्द्र सिंह राठौड़ उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी का नाम लिए बगैर विकास कायों में भेदभाव को लेकर खूब गरजे। वह भी ऐसे वक्त में जब चुनावी वर्षमें राज्य सरकार और भाजपा आलाकमान ने सभी विधायक-सांसदों को अपने इलाकों में जाकर विकास का ढोल पीटने की जिम्मेदारी दी है। राठौड़ ने राजसमंद जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों में से केवल मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यमंजूर करने और बाकी तीनों विधायकों के इलाकों की घोर अनदेखी करने के आरोप जिला परिषद अधिकारियों पर जड़े। विधायक ने यहां तक कह दिया कि क्या मंत्री को खुश करने से ही जिला परिषद चलेगी? राठौड़ का गर्ममिजाज देख अधिकारियों को मानो सांप सूघ गया। विधायक के वक्तव्य की काफी देर तक चर्चा होती रही। जिला प्रमुख प्रवेश कुमार सालवी की अध्यक्षता में शुरू हुई बैठक हंगामेदार तो नहीं रही, लेकिन कुम्भलगढ़ विधायक सुरेन्द्र सिंह राठौड़ के उखड़े मिजाज से अधिकारियों के लिए कसैली हो गई। राठौड़ ने जिला परिषद की कार्यप्रणाली पर खासी नाराजगी जताई। आरोप लगाया कि विकास कार्य केवल राजसमंद विधानसभा क्षेत्र में ही हुआ है। दूसरे विधानसभा क्षेत्र नाथद्वारा, कुम्भलगढ़ में न के बराबर काम हुआ है। राठौड़ ने तंज कसा कि जिला परिषद केवल राजसमंद क्षेत्र में ही विकास कार्य की स्वीकृति देती है, जबकि तीन अन्य विधानसभा क्षेत्र भी हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे इलाकों के मनरेगा, सडक़ और अन्य विकास कार्य स्वीकृति के लिए सरपंच प्रतिनिधियों और जिला परिषद सदस्यों के परिषद के चक्कर लगाते-लगाते जूते घिस जाते हैं, लेकिन काम मंजूर नहीं होते।
जो खातिरदारी करे, उन्हीं के होते हैं काम
उन्होंने उच्च मंत्री किरण माहेश्वरी का नाम लिए बगैर कहा, एक मंत्री को खुश करने से जिला परिषद चल जाएगी क्या? उन्हें खुश करने के लिए सभी विकास कार्यों की स्वीकृति केवल राजसमंद विधानसभा क्षेत्र में दी जाती है। विधायक ने मौजूद अधिकारियों पर आरोप लगाए कि जिन जनप्रतिनिधियों से ज्यादा गहरे ताल्लुक होते हैं या जो खातिरदारी करते हैं, उन्हीं के काम लेकर आगे बढ़ाए जाते हैं। हालांकि उन्होंने किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि का नाम नहीं लिया। राठौड़ ने कहा कि एक विधानसभा क्षेत्र से ही जिला परिषद चलेगी? और कोई विधानसभा इन्हें क्यों नहीं दिखाई देती? अपनी कुम्भलगढ़ क्षेत्र में भी विकास कार्य को लेकर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप जड़ा।
सदन में चुप्पी, सांसद भी बरसे
विधायक के चेतावनी भरे पांच मिनट के भाषण में पूरा सदन चुप्पी साधे बैठ गया। फिर सांसद हरिओम सिंह राठौड़ ने भी लगे हाथ जनसमस्याओं का समय पर निस्तारण नहीं होने पर विभिन्न विभागीय अधिकारियों की लापरवाही उजागर की। उन्होंने कहा, कई साल हो गए परषिद के सदन में, लेकिन ऐसी पहले लापरवाही कभी नहीं देखी है। परिषद अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ रहे हैं। वाकई में अन्य क्षेत्रों में कोई काम नहीं किए जा रहे हैं। सांसद ने कहा कि सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का लक्ष्य समय पर पूरा करें। उन्होंने राय दी कि कोई पहला काम जब तक पूरा नहीं हो जाए, तब तक दूसरा शुरू नहीं करें। सांसद ने पेयजल समस्या, नरेगा कार्य, सडक़ और केन्द्र सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन समय पर न होने पर कड़ा रुख अपनाने की चेतावनी दी।
पत्रिका के उठाए मुद्दे भी रखे
जिला परिषद सदस्यों ने दर्जनों समस्याएं सदन में सामने रखी। राजस्थान पत्रिका द्वारा उठाए गए मुद्दे महिला अधिकारिता विभाग को एक साल बाद भी धनलक्ष्मी केन्द्र का हस्तांतरण नहीं करना एवं आंगनवाड़ी केन्द्र में आशा सहयोगिनी और सहायिकाओं के चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिलना भी सदन में रखे गए, लेकिन उनका राजनीतिक सम्बंध होने से ज्यादा बहस नहीं की और सभी ने चुप्पी साध ली।
स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं
जिला परिषद सदस्य नीतू असावा ने कुम्भलगढ़ में महिला रोग चिकित्सक नहीं होने पर रोष जताया और कहा कि स्वास्थ्य केन्द्र में एक भी नर्सिंग स्टॉफ का नहीं है, लोगों को बहुत मुश्किलें हो रही है। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताया। स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने से महिलाओं को काफी परेशानी रहती है। जवाब में चिकित्सा अधिकारियों ने कहा कि जिले में गायनोकोलॉजिस्ट की बहुत कमी है। जिला चिकित्सालय के अलावा कहीं भी उपलब्धता नहीं है। प्रस्ताव सरकार को भेज रखा है।
कलक्टर ने भी फटकारा
कलक्टर पीसी बेरवाल ने जनप्रतिनिधियों द्वारा हैण्डपम्प, राशन डीलर की शिकायत, बिजली, पानी, चिकित्सा आदि कई जनसमस्याओं का समय पर निस्तारण नहीं होने से अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। बजरी के अवैध खनन के मुद्दे के बीच खान अधिकारियों व श्रम विभाग के अधिकारियों की सदन में गैर मौजूदगी पर भी नाराजगी व्यक्त की गई। इस दौरान एसीईओ गोविंद सिंह राणावत, चिकित्सा, सिंचाई, परिवहन, विद्युत निगम, महिला एवं बाल विकास, वन, कृषि विभाग, विकास अधिकारी समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।