
देवगढ़. नगर पालिका अध्यक्ष से निर्दलीय पार्षदों के समर्थन वापस लेने के बाद अब उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने को लेकर भी तैयारियां जोर-शोर से, लेकिन पूरी तरह गुपचुप तरीके से चल रही है। नगर पालिका के फरवरी २०१५ में हुए चुनाव के बाद पूर्व गृहराज्य मंत्री व कांग्रेस नेता डॉ. लक्ष्मणसिंह रावत एवं भाजपा के पूर्व नगर मंडल अध्यक्ष अजय सोनी के बीच लिखित समझौते के तहत ढाई वर्ष के लिए अध्यक्ष पद अंजना जोशी को मिला था। इसके बाद समझौते के तहत फरवरी 2018 में उन्हें इस्तिफा देकर उपाध्यक्ष रेखा सोनी को अगले ढाई वर्ष तक अध्यक्ष बनवाना था। लेकिन, कांग्रेस द्वारा समझौते की पालना नहीं किए जाने पर सोनी खेमे के पार्षदों ने अध्यक्ष से समर्थन वापस लेते हुए विपक्ष में बैठने का निर्णय हाल ही में लिया गया। इसके बावजूद किसी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होने से पालिकाध्यक्ष की सीट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। ऐसे में अब निर्दलीय पार्षद, उपाध्यक्ष व भाजपा पार्षदों के बीच अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए गुपचुप रणनीति बनाने को लेकर बैठकों दौर शुरू हो चुके हैं। हालांकि, पालिका में पार्षदों की स्थिति को देखते हुए यह काम काफी मुश्किल है क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव के लिए 20 में से 14 पार्षदों का समर्थन चाहिए। पालिका में वर्तमान स्थिति में भाजपा के ८, कांगे्रस के ७ एवं ५ पार्षद निर्दलीय हैं। ऐसे में निर्दलीय व ीभाजपा पार्षदों के मिलने पर यह संख्या 13 होती है, जिसके चलते एक पार्षद कांग्रेस से तोडऩे पर ही अविश्वास प्रस्ताव पारित हो सकता है।
कांग्रेस को चाहिए भाजपा का साथ
ताजा हालत में कांग्रेस को अविश्वास प्रस्ताव को रोकने व जोशी को अध्यक्ष बनाए रखने के लिए भाजपा पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि पूर्व में भाजपा के पदाधिकारी रह चुके सोनी के प्रभाव को बढऩे से रोकने के लिए यह प्रयास भी किए जा सकते हैं। वैसे फिलहाल इसको लेकर दोनों पक्षों में कोई गतिविधि दिखाई नहीं दे रही।
Published on:
11 Apr 2018, 8:41 AM IST
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