रामपुर

क्या यह मुसलमान होने की सजा है? जेल से बाहर आते ही छलका आजम खान का दर्द, कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल

Azam Khan University Controversy: रामपुर जेल से रिहा होने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने कहा कि कहने को क्या बचा है? मैं क्या कह सकता हूं? कानून खत्म हो गया है। मुसलमान होने की यह सजा है।
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Updated: 31 Oct 2026, 8:42 PM IST
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आजम खान डिस्ट्रिक्ट जेल से बाहर निकले (फोटो: IANS/वीडियो ग्रैब)

Azam Khan Released From Jail: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान की कानूनी उलझनें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट से दो पैन कार्ड मामले में बड़ी राहत मिलने के बाद जैसे ही आजम खान रामपुर जेल से बाहर आए, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तुरंत कस्टडी में ले लिया। ईडी की इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद रामपुर का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है।

यूनिवर्सिटी बनाना ही हमारा गुनाह था: आजम खान

जेल के गेट से बाहर निकलते ही मीडिया से मुखातिब हुए आजम खान का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने भावुक और तल्ख लहजे में कहा कि अब कहने को बचा ही क्या है? देश में कानून का वजूद खत्म हो चुका है। क्या यह मुसलमान होने की सजा है? हमारा कसूर सिर्फ इतना था कि एक मुसलमान ने बच्चों के लिए यूनिवर्सिटी और स्कूल बनवाए। क्या तालीम का जरिया बनाना हमारा अपराध है?

हाईकोर्ट से मिली राहत, पर ED ने कसा शिकंजा

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की सजा पर रोक और अंतरिम जमानत की अर्जी मंजूर करते हुए राहत दी थी। लेकिन रिहाई की प्रक्रिया पूरी होते ही पहले से मुस्तैद ईडी की टीम ने उन्हें जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में हिरासत में ले लिया। ईडी अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें कल यानी रविवार का गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट में पेश किया जाएगा।

रामपुर में अलर्ट और समर्थकों में आक्रोश

जेल से छूटते ही दोबारा कस्टडी में लिए जाने से आजम समर्थकों में गहरा आक्रोश है। समर्थकों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। किसी भी अनहोनी या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए रामपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

जाने क्या है पूरा मामला

आपको बता दें कि इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 29 अक्टूबर को दो पैन कार्ड रखने के मामले में आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत दी थी। अदालत ने दोनों की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी गई। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने दोनों की पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। याचिकाओं में अधीनस्थ अदालतों द्वारा दो पैन कार्ड रखने के मामले में सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दी गई थी।

Updated on:
31 Oct 2026, 8:42 PM IST
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