UP Bypolls 2023: स्वार सीट से भाजपा मुस्लिम प्रत्याशी उतार सकती है। इसके पीछे की वजह पार्टी की हालिया रणनीति लगती है।
उत्तर प्रदेश की स्वार सीट पर उपचुनाव घोषित हो गया है। आजम खान के बेटे अब्दुल्ला की विधायकी जाने से ये सीट खाली हुई है। भाजपा की निगाह रामपुर सदर की तरह इस सीट को भी सपा से छीनने पर है। ऐसे में बीजेपी की ओर से रामपुर के नवाब खानदान पर उपचुनाव में दांव लगाया जा सकता है।
भाजपा के कैंडिडेट इस सीट पर नवाब काजिम अली खान हो सकते हैं। उनको बीजेपी कैंडिडेट बना सकती है। इसके पीछे एक तरफ सीट पर जीत का उनका पुराना रिकॉर्ड है तो दूसरी ओर मुस्लिमों की तरफ मुस्लिमों की ओर कदम बढ़ाने का मौका भी पार्टी के लिए है। इसके अलावा भी 2 अहम वजह हैं, जिनसे लगता है कि काजिम बीजेपी उम्मीदवार हो सकते हैं।
स्वार सीट का गणित नवाब काजिम के पक्ष में कैसे?
स्वार सीट पर बीते 2 चुनाव यानी 2017 और 2022 में सपा के अब्दुल्ला ने एकतरफा जीत हासिल की। 2022 में यहां से नवाब काजिम के बेटे हैदर अली को 30% वोट मिले थे लेकिन वो हार गए थे। हालांकि नवाब काजिम का रिकॉर्ड यहां अच्छा रहा है।
नवाब काजिम अली खान 2002, 2007 और 2012 में स्वार सीट पर जीत की हैट्रिक बना चुके हैं। 2017 में यहां से बसपा के टिकट पर चुनाव हारे थे लेकिन 42 हजार वोट हासिल करने में कामयाब रहे थे। स्वार से शिव बहादुर सक्सेना के अलावा नवाब काजिम अकेले ऐसे नेता है, जिन्होंने जीत की हैट्रिक बनाई है।
भाजपा क्यों लगा सकती है मुस्लिम प्रत्याशी पर दांव?
उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा में भाजपा ने एक भी मुस्लिम कैंडिडेट नहीं उतारा था लेकिन चुनाव के बाद से पार्टी की रणनीति में एक बदलाव देखने को मिल रहा है। भाजपा प्रदेश में लगातार मुसलमानों, खासतौर से पसमांदा यानी पिछड़ी जातियों के मुसलमानों को लुभाने की कोशिश में लगी है।
बीजेपी ने बीते साल के आखिर में रामपुर में बड़ा पसमांदा सम्मेलन किया था। मुस्लिमों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए बीजेपी ने पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम के भाषणों की किताब को उर्दू में भी तर्जुमा किया है। किताब को मुस्लिम इलाकों में बांटा जाएगा।
भाजपा पश्चिम यूपी में मुस्लिम स्नेह मिलन सम्मेलन कार्यक्रम की भी शुरुआत करने जा रही है। यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने निकाय चुनाव में मुस्लिमों को टिकट देने की भी बात कही है।
ये सब बातें हैं जो इशारा करती हैं कि भाजपा मुस्लिमों से दूरी कम करने की कोशिश कर रही है। स्वार मुस्लिम बहुल सीट है और पश्चिम यूपी में भी आती है। पश्चिम यूपी के रामपुर, मुरादाबाद, संभल, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर जैसे जिलों में मुस्लिमों की तादाद अच्छी खासी है। ऐसे में स्वार से मुस्लिम कैंडिडेट उतारकर बीजेपी मुसलमानों के बीच सकारात्मकत संदेश दे सकती है।
नंबर 3- नवाब काजिम का भाजपा पर क्या है अहसान?
भाजपा की ओर से नवाब काजिम को कैंडिडेट बनाकर दो काम एक तीर से किए जा सकते हैं। पहला नवाब काजिम का बीते साल के आखिल में हुए रामपुर सदर उपचुनाव का अहसान उतारा जा सकता है। इस उपचुनाव में काजिम खान ने बीजेपी को खुलेआम समर्थन दिया था। इसके बदले कांग्रेस ने उनको पार्टी से भी निकाल दिया लेकिन काजिम खान भाजपा के पक्ष में मजबूती से खड़े रहे।
भाजपा अगर नवाब काजिम को कैंडिडेट बनाती है तो ये एक तरह से उनको रामपुर उपचुनाव में उनके समर्थन का बदला चुकाने जैसा होगा। इसके साथ-साथ पार्टी के मुस्लिम कार्यकर्ताओं में भी इससे संदेश जाएगा कि मौका आने पर उनको भी टिकट दिया जा सकता है।
भाजपा के पास मजबूत कैंडिडेट भी नहीं
स्वार सीट पर भाजपा का रिकॉर्ड बीते 3 चुनाव से बहुत अच्छा नहीं रहा है। 2012 और 2017 में बीजेपी ने लक्ष्मी सैनी को टिकट दिया। सैनी 2012 में वो नवाब काजिम से तो 2017 में अब्दुल्ला से चुनाव हार गए। 2022 में भाजपा ने ये सीट सहयोगी अपना दल को दे दी। अपना दल भी कोई खास चुनौती सपा के अब्दुल्ला को देने में नाकाम रहा। ऐसे में भाजपा कांग्रेस से निकाले गए नवाब काजिम पर दांव लगा दे तो कोई चौंकाने वाली बात नहीं होगी।
स्वार में कब होंगे चुनाव
चुनाव आयोग ने स्वार और छानबे सीट पर उपचुनाव के लिए ऐलान किया है। आयोग ने बताया है कि 10 मई को दोनों सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इसके 3 दिन बाद 13 मई को वोटों की गिनती होगी और रिजल्ट आएंगे।