रामपुर

आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन पर कब्जा कर सकती है योगी सरकार

Highlights - आजम खान को जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत - जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि ट्रस्ट ने शर्तों का उल्लंघन किया - कहा- जांच पड़ताल में सभी सबूत जौहर ट्रस्ट के खिलाफ

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Dec 10, 2020

रामपुर. सांसद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन को योगी सरकार कब्जे में ले सकती है। आजम को इस केस में हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। अब यह केस अपर जिलाधिकारी की कोर्ट में विचाराधीन है। यह केस खुद प्रशासन की ओर से ही जांच के बाद दर्ज कराया गया है। इस केस में सभी सबूत आजम खान की जौहर ट्रस्ट के विरूद्ध हैं।

उल्लेखनीय है कि सांसद आजम खान की मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की की जमीन को लेकर काफी समच से विवाद चल रहा है। पिछले वर्ष जुलाई में जमीन कब्जाने के 30 मुकदमे आजम खान के खिलाफ दर्ज हुए थे। इसके बाद योगी सरकार ने आजम खान को भूमाफिया घोषित कर दिया था। इसके साथ ही किसानों को उनकी जमीन पर कब्जा भी दिला दिया गया था। इसके अलावा चक रोड की भूमि पर बनी इमारतों को ध्वस्त कर दिया गया था।

बता दें कि इस मामले में भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के वेस्ट यूपी संयोजक आकाश सक्सेना ने शासन स्तर पर शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन खरीदने में नियमों का उल्लंघन किया गया था। जौहर ट्रस्ट को सरकार ने साढ़े 12 एकड़ से ज्यादा भूमि खरीदने की अनुमति कुछ शर्तों के साथ प्रदान की दी थी। उस दौरान ट्रस्ट ने गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा और चैरिटी कार्य की बात कही, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद प्रशासन की जांच में सभी आरोप सही पाए गए। इस पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन की कोर्ट में केस दायर किया गया।

जौहर ट्रस्ट के अधिवक्ता का तर्क था कि आजम खान ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और माैजूदा समय में जेल में बंद हैं। इसलिए अधिवक्ता कमिश्नर नियुक्त हो, जो सीतापुर जेल जाकर उनके बयान दर्ज करे। लेकिन, कोर्ट ने इस मांग को मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद वह वह हाईकोर्ट गए, लेकिन हाईकोर्ट में भी याचिका लंबित है। इस मामले में बुधवार को अपर जिलाधिकारी प्रशासन जगदंबा प्रसाद गुप्ता की कोर्ट में सुनवाई हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता अजय तिवारी ने पक्ष रखा, लेकिन ट्रस्ट की तरफ से उनका पक्ष नहीं मिल सका। इस पर कोर्ट ने 20 दिसंबर तक ट्रस्ट को लिखित में अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही 24 दिसंबर को फैसला सुनाने का आदेश दिया गया है। जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि ट्रस्ट ने शर्तों का उल्लंघन किया है। सभी सबूत जौहर ट्रस्ट के खिलाफ हैं। ऐसे में सरकार यूनिवर्सिटी की जमीन पर कब्जा कर सकती है।

Published on:
10 Dec 2020 11:15 am
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