
(पत्रिका ब्यूरो,रांची): झारखंड में रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड के नावाडीह पंचायत अंतर्गत चैनपुर गांव के जरहैया टोला के आदिम जनजाति परिवार के सदस्य राजेंद्र बिरहोर की भूखजनित बीमारी से मौत के मामले में राजनीति तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. अजय कुमार ने रविवार को मृतक राजेंद्र बिरहोर की पत्नी से उसके घर जाकर मुलाकात की और बाद में भूख से मौत मामले को लेकर स्थानीय घाटो ओपी में शिकायत दर्ज कराई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा दर्ज कराई शिकायत में मुख्यमंत्री रघुवर दास, खाद्यान आपूर्ति मंत्री सरयू राय, स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी और कल्याण मंत्री लुईस मरांडी समेत विभागीय सचिव और संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया गया है।
मामले की जांच करने को कांग्रेस ने गठित की समिति
इस मौके पर पूर्व विधायक केशव महतो कमलेश, प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश ठाकुर, प्रदेश प्रवक्ता राजेश रंजन, वरिष्ठ नेता विनय सिन्हा दीपू और रवींद्र सिंह समेत अन्य नेता मौजूद थे। इससे पहले राजेंद्र बिरहोर की मौत मामले में प्रदेश कांग्रेस की ओर से सात सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था, इस जांच समिति में कांग्रेस के जोनल कॉर्डिनेटर केशव महतो कमलेश,रामगढ़ जिला अध्यक्ष मुन्ना पासवान,रामगढ़ विधानसभा प्रभारी डॉ. राकेश किरण महतो, कॉर्डिनेटर आदिवासी कांग्रेस सतीश पॉल मुंजनी, माण्डु विधानसभा प्रभारी मनोज गुप्ता ,वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीन्द्र कुमार एवं रमा मुण्डा जी शामिल थे।
पीड़ित परिवार व पड़ोसियों से मिलकर ली यह जानकारी
इस जांच कमेटी ने शनिवार को ही गांव जाकर पीड़ित परिवार और उनके पड़ोसियों से बातचीत की। मृतक के परिजनों और उनके पड़ोसियों ने जांच कमिटी के सदस्यों को बताया कि राजेंद्र बिरहोर की मौत 24जुलाई को भूख और चिकित्सा के अभाव में हुई है। वे पिछले एक माह से अस्वस्थ थे एवं दो दिन से उन्होंने खाना नहीं खाया था। उनके परिवार में उनके अलावा उनकी पत्नी एवं छह बच्चे हैं। उनके परिवार को पहले सरकार के जनवितरण प्रणाली से राशन मिलता था परन्तु आधार कार्ड से जुड़े (टैग) नहीं होने के कारण पिछले लगभग एक वर्ष से उनको राशन नहीं मिलता था। घर में अनाज के अभाव में राजेन्द्र बिरहोर के बीमार हो जाने के कारण उनकी पत्नी को अपने छह (6)बाल-बच्चों को पालने-पोसने के लिए दुसरे के घरों में जाकर मजदूरी करनी पड़ती थी। एक माह से बीमार रहने के बावजूद अर्थाभाव में परिवार वाले उनकी समुचित चिकित्सा करवाने में पूरी तरह से असक्षम थे।
पास के स्वास्थ्य केंद्र में नहीं कोई चिकित्सक
जांच में यह भी बात सामने आई कि राजेन्द्र बिरहोर के घर से 500 मीटर की दूरी पर अवस्थित स्वास्थ्य उपकेन्द्र में कभी कोई चिकित्सक बैठते ही नहीं और यह केन्द्र मात्र एक वृद्ध ए.एन.एम. के भरोसे चलता है,जिससे किसी तरह की बीमारी की चिकित्सा की आशा नहीं की जा सकती है। इस बिरहोर मुहल्ले में अभी मात्र दो ही बिरहोर परिवार के लोग रहते हैं, बाकि अन्य सदस्य सरकारी उपेक्षा के कारण जीविकोपार्जन के लिए अन्यत्र पलायन कर गए हैं।